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इंडोनेशिया में ‘15 दिन की शादी’ का चलन: परंपरा या आर्थिक मजबूरी?

जब हम शादी की बात करते हैं, तो मन में आजीवन साथ, प्यार, विश्वास और जिम्मेदारी जैसे भाव आते हैं। लेकिन क्या हो अगर शादी महज कुछ दिनों की हो—सिर्फ 5, 10 या 15 दिन की? और अगर ये रिश्ता केवल पैसों के लिए हो, तो इसे आप क्या कहेंगे? इंडोनेशिया के एक इलाके में यह रिवाज अब न केवल आम होता जा रहा है, बल्कि एक व्यवसायिक मॉडल में तब्दील हो चुका है।


क्या है ‘मुताह निकाह’?

इंडोनेशिया के पुंकाक क्षेत्र में इन दिनों एक तरह की ‘अस्थायी शादी’ का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘मुताह निकाह’ या अंग्रेज़ी में ‘Pleasure Marriage’ कहा जाता है। यह परंपरा इस्लामी इतिहास में खासकर शिया समुदाय के बीच प्रचलित रही है, जहां पुरुष और महिला आपसी सहमति से कुछ सीमित समय—जैसे 5 या 15 दिन के लिए—विवाह बंधन में बंधते हैं।

समय समाप्त होने के बाद, यह रिश्ता बिना किसी तलाक प्रक्रिया के स्वतः समाप्त हो जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह प्रथा उन पुरुषों के लिए थी जो यात्रा में लंबा समय बिताते थे, लेकिन आज इसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।


जब विवाह बन गया उद्योग

जहां कुछ देशों में यह परंपरा खत्म होने की कगार पर है, वहीं इंडोनेशिया में यह अब “टूरिज्म-प्लस-मैरिज” इंडस्ट्री बन चुकी है। पुंकाक में सैकड़ों युवा महिलाएं, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर तबके की लड़कियां, विदेशी पर्यटकों के साथ 5 से 20 दिन की विवाह-संधि में शामिल होती हैं।

बदले में मिलने वाली रकम – 300 से 500 डॉलर तक, जो एक गरीब लड़की के लिए बड़ी रकम मानी जाती है।


कौन हैं ग्राहक?

इस तरह की शादियों में सबसे अधिक पर्यटक खाड़ी देशों से आते हैं – विशेष रूप से सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे देशों से। वे ट्रैवल एजेंट्स के ज़रिए अपनी ‘पत्नी’ का चयन करते हैं, कुछ दिन बिताते हैं और फिर बिना कोई ज़िम्मेदारी लिए लौट जाते हैं।

इन महिलाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे न केवल घरेलू काम करें, बल्कि यौन सेवाएं भी प्रदान करें।


वास्तविकता: आकर्षण के पीछे की कड़वाहट

भले ही इसे एक तरह का समझौता कहा जाए, लेकिन असल में यह एक गहरे शोषण की कहानी है।

  • इनमें से कई लड़कियां बहुत कम उम्र में इस प्रक्रिया में धकेली जाती हैं।

  • उदाहरण के लिए, एक लड़की ने 13 साल की उम्र में अपनी पहली ‘मुताह शादी’ की थी — और अब तक 15 से ज़्यादा ऐसी शादियों का हिस्सा बन चुकी है।

  • उसे उसके दादा-दादी ने जबरन इसमें धकेला, और आज वह अपनी बेटी के पालन-पोषण का खर्च भी इन्हीं अस्थायी रिश्तों से चलाती है।


बिजनेस बन चुके हैं एजेंट्स और होटल्स

अब यह सब कुछ एक संगठित सिस्टम के तहत होता है।

  • एजेंट्स हर महीने 20 से 25 ‘शादियों’ की व्यवस्था करते हैं।

  • होटल और रिज़ॉर्ट्स ने इसके लिए “हाईलैंड प्लेजर पैकेज” जैसे नाम दे रखे हैं, जिसमें पर्यटकों को ‘पत्नी’ और रहने की पूरी व्यवस्था दी जाती है।


न अधिकार, न सुरक्षा

इस सिस्टम में महिलाएं पूरी तरह असुरक्षित हैं।

  • न तो उनके पास कानूनी अधिकार होते हैं,

  • न ही कोई सुरक्षा गारंटी

  • इस ‘शादी’ में भावनाओं की कोई जगह नहीं — यह महज एक लाभ का सौदा बनकर रह गया है।


निष्कर्ष: परंपरा से व्यापार तक का सफर

इंडोनेशिया के कुछ इलाकों में मुताह निकाह अब एक सांस्कृतिक रिवाज नहीं, बल्कि आर्थिक विवशता और पर्यटकों की मांग के कारण एक गुप्त व्यापार का रूप ले चुका है।
जहां एक ओर यह महिलाओं को कुछ वित्तीय राहत देता है, वहीं दूसरी ओर यह उनकी गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों के लिए बड़ा खतरा भी है।

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