तेहरान/यरुशलम: पश्चिम एशिया में तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब इसराइल ने शुक्रवार तड़के ईरान में कई लक्ष्यों पर सैन्य हमले किए। इन हमलों में इसराइली वायुसेना ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठानों और सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाया। इसराइल ने अपने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ नाम दिया है।
ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि हमलों में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के शीर्ष कमांडर हुसैन सलामी सहित कई परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इसके अलावा, नातांज स्थित यूरेनियम संवर्धन केंद्र समेत अन्य सैन्य ठिकानों को भी क्षति पहुंची है।
हमले कब और कहां हुए?
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार सुबह 3:30 बजे तेहरान सहित उत्तर-पूर्वी इलाकों में तेज़ धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। कुछ रिहायशी क्षेत्रों में भी विस्फोट की खबरें सामने आई हैं। इसके कुछ घंटों बाद नातांज परमाणु केंद्र में एक बड़ा धमाका हुआ, जो राजधानी से लगभग 225 किलोमीटर दूर स्थित है।
इसराइल में भी इसी समय नागरिकों को आपात चेतावनी सायरनों और मोबाइल अलर्ट्स के जरिए सतर्क किया गया।
इसराइल की प्रतिक्रिया: ‘तत्काल खतरे को निष्क्रिय किया’
प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान ईरान के परमाणु खतरे को रोकने के लिए ज़रूरी था। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान संवर्धित यूरेनियम के ज़रिए हथियार निर्माण के करीब पहुंच चुका था।
“अगर ईरान को रोका नहीं जाता तो वह महीनों, शायद हफ्तों के भीतर परमाणु हथियार बना सकता था। यह इसराइल के अस्तित्व पर सीधा खतरा था।”
— बिन्यामिन नेतन्याहू
इसराइल ने दावा किया है कि ईरान की ओर से उसके खिलाफ करीब 100 ड्रोन दागे गए थे, जिनमें से अधिकांश को निष्क्रिय कर दिया गया।
ईरान की चेतावनी: ‘इस हमले की भारी कीमत चुकानी होगी’
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने इसराइल और अमेरिका को गंभीर नतीजों की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इस आक्रामक कार्रवाई का जवाब ज़रूर दिया जाएगा।
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस हमले को “ईरान के खिलाफ एक दुष्टतापूर्ण कदम” बताया और कहा कि इसका परिणाम इसराइल के लिए “कड़वा भविष्य” लेकर आएगा।
ईरान की सरकारी एजेंसियों ने पुष्टि की है कि हमले में कम से कम पांच उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारी और दो वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं।
ट्रंप और अमेरिका की भूमिका
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइली हमले को “उत्कृष्ट और ज़रूरी” बताया और कहा कि ईरान को कई बार समझौते का अवसर दिया गया था, लेकिन उसने इसे गंवा दिया। ट्रंप ने यह बयान ट्रुथ सोशल पर साझा किया।
हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं था। उन्होंने कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता क्षेत्र में अपने बलों की सुरक्षा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंता
ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि यह हमला पहले से संवेदनशील क्षेत्र को और अधिक अस्थिर कर सकता है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम: नागरिक या सैन्य?
ईरान बार-बार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को उसके दावों पर संदेह है।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने यूरेनियम को 60% शुद्धता तक संवर्धित किया है, जो हथियार-ग्रेड स्तर के बेहद करीब है। IAEA का दावा है कि ईरान के पास अब इतने संवर्धित यूरेनियम का भंडार है जिससे लगभग नौ परमाणु बम बनाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष:
इसराइल और ईरान के बीच यह टकराव सिर्फ़ दो देशों तक सीमित नहीं है। यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय और वैश्विक संकट की संभावना को जन्म दे रहा है, जिसकी लपटें अन्य देशों तक भी फैल सकती हैं।
CHANNEL009 Connects India
