अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, और इस बार निशाने पर है ईरान का ऊर्जा निर्यात। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त चेतावनी जारी की है कि जो भी देश या कंपनी ईरान से कच्चा तेल या पेट्रोकेमिकल्स खरीदेगी, उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर चल रही वार्ता एक बार फिर ठप हो गई है। ओमान, जो इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने पुष्टि की है कि बातचीत अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई है।
ट्रंप का अल्टीमेटम: “तेल लेना है या अमेरिका से व्यापार?”
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि ईरानी तेल खरीदने वाले किसी भी देश या व्यक्ति को अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, ऐसे देशों को अमेरिका के साथ व्यापार करने से भी रोक दिया जाएगा।
यह चेतावनी न सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित है, बल्कि चीन, भारत और कई अन्य देशों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
चीन सबसे बड़ी मार के दायरे में
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी वॉर्टेक्सा के अनुसार, मार्च 2025 में चीन ने प्रतिदिन लगभग 18 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल खरीदा — जो एक नया रिकॉर्ड था। अमेरिका ने हाल ही में चीन की एक प्रमुख रिफाइनरी पर एक अरब डॉलर से अधिक के ईरानी तेल सौदे के कारण प्रतिबंध भी लगा दिया।
भले ही ट्रंप ने सीधे चीन का नाम न लिया हो, लेकिन उनके बयानों से संकेत स्पष्ट हैं — अगला बड़ा झटका चीन को लग सकता है।
भारत की स्थिति क्या है?
भारत पर फिलहाल इस नीति का सीधा असर नहीं पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने 2019 तक ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात किया था, लेकिन 2020 के बाद से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह व्यापार बंद है।
वर्तमान में भारत अपनी तेल ज़रूरतें इराक, सऊदी अरब, रूस और यूएई जैसे देशों से पूरी कर रहा है। अप्रैल 2025 तक भारत ने ईरान से कोई तेल आयात नहीं किया। हालांकि, अगर प्रतिबंधों के चलते वैश्विक आपूर्ति में कमी आती है और कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है — विशेष रूप से महंगाई के मोर्चे पर।
ईरान कैसे निकाल रहा है रास्ता?
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने वैकल्पिक रास्ते ढूंढ़ लिए हैं। वह चीन के अलावा इराक, तुर्की, यूएई और कुछ यूरोपीय देशों को भी तेल निर्यात कर रहा है। अगस्त 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान बांग्लादेश और ओमान जैसे देशों को भी गुपचुप तरीके से तेल बेच रहा है।
अमेरिका को ईरानी तेल से क्या खतरा?
ईरान दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है और उसके पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार है। वह OPEC का तीसरा सबसे बड़ा सदस्य भी है। अमेरिका की चिंता यह है कि अगर ईरान पर से प्रतिबंध हटते हैं और वह खुलेआम तेल बेचने लगता है, तो उसकी आर्थिक और रणनीतिक ताकत बढ़ेगी — और वह परमाणु डील में अमेरिका के सामने कठोर शर्तें रख सकता है।
इसलिए ट्रंप ने एक बार फिर कठोर रुख अपनाते हुए ईरान के खिलाफ आर्थिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
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