पेरिस/जिनेवा:
ईरान और इज़राइल के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के लिए यूरोपीय देशों ने एक अहम शांति प्रस्ताव तैयार किया है। इस पहल का नेतृत्व फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर रहे हैं, जिसमें ईरान से कुछ बड़े और संवेदनशील कदम उठाने की मांग की गई है।
इस प्रस्ताव में ईरान से आग्रह किया गया है कि वह—
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यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह रोक दे,
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अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करे,
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और मध्य पूर्व में सक्रिय आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद देना बंद करे।
परमाणु कार्यक्रम पर अस्थायी समझौते की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय नेता एक अस्थायी समझौते पर भी विचार कर रहे हैं, जिसमें ईरान डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल तक यूरेनियम संवर्धन को निलंबित रखने पर सहमत हो सकता है।
एक अन्य प्रस्ताव में ईरान, सऊदी अरब और UAE के बीच साझा नियंत्रण प्रणाली स्थापित करने की बात हो रही है, जिससे परमाणु हथियार निर्माण की आशंका को रोका जा सके।
हालांकि, ईरान का कहना है कि वह NPT (परमाणु अप्रसार संधि) का हस्ताक्षरकर्ता है और उसके पास अपने क्षेत्र में यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है।
जिनेवा में अहम बातचीत, अमेरिका पर भरोसे की कमी
फ्रांसीसी, जर्मन और ब्रिटिश विदेश मंत्रियों ने जिनेवा में ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से बातचीत की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब ईरान पर इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमले को लेकर तनाव चरम पर है।
अराग़ची ने अमेरिका से सीधे वार्ता से इनकार करते हुए कहा—
“जब तक इज़राइल की आक्रामकता जारी है, तब तक अमेरिका से बातचीत का कोई औचित्य नहीं। वे बार-बार संदेश भेज रहे हैं लेकिन हम साफ कह चुके हैं—आक्रमण बंद हो, तभी संवाद संभव है।”
मैक्रों की चेतावनी और यूरोप का रुख
राष्ट्रपति मैक्रों ने शुक्रवार को कहा—
“अगर इस संघर्ष को खत्म करना है तो जरूरी है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से गंभीर और ठोस वार्ता शुरू हो। हम न केवल संवर्धन, बल्कि बैलिस्टिक गतिविधियों और आतंकी फंडिंग पर भी नियंत्रण चाहते हैं।”
उन्होंने ईरान की फोर्डो (Fordow) परमाणु साइट पर भी चिंता जताई, जो इतनी सुरक्षात्मक है कि वहां हमला करना लगभग असंभव है।
ईरान का रुख और वैश्विक प्रतिक्रिया
ईरान बार-बार कह चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। लेकिन इज़राइल और अमेरिका को आशंका है कि वह हथियार निर्माण के करीब है।
इस बीच, नोबेल विजेता ईरानी कार्यकर्ता नर्गिस मोहम्मदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से अपील की:
“कृपया इस युद्ध में शामिल न हों। मध्य पूर्व में शांति के लिए आवाज उठाइए।”
रूस ने मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन यूरोपीय देशों ने उसे खारिज कर दिया है।
क्या इज़राइल अपने लक्ष्य में सफल होगा?
जहां एक ओर इज़राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज की है, वहीं दूसरी ओर उसकी रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फोर्डो जैसी गहराई में बनी यूरेनियम संवर्धन साइटों को पारंपरिक बमों से नष्ट करना संभव नहीं है।
ऐसे में जब तक अमेरिका बंकर बस्टर बमों के उपयोग की इजाज़त नहीं देता, नेतन्याहू को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
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