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ईरान का इजरायल पर जबरदस्त मिसाइल अटैक, स्टॉक एक्सचेंज और अस्पताल को किया निशाना

यरुशलम/तेहरान: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जंग के सातवें दिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के कई प्रमुख शहरों पर मिसाइलों की बारिश कर दी, जिनमें राजधानी तेल अवीव, बीर्शेबा, रमत गान, और होलोन शामिल हैं। मिसाइलों की धमक यरुशलम तक सुनी गई।


📌 स्टॉक एक्सचेंज और अस्पताल बने लक्ष्य

ईरानी मिसाइल हमलों में तेल अवीव स्थित इजरायली स्टॉक एक्सचेंज को गंभीर नुकसान पहुंचा। इसके अलावा, बीर्शेबा के सोरोका मेडिकल सेंटर में एक मिसाइल गिरने से अस्पताल की इमारत को क्षति हुई और कई लोग घायल हो गए। अस्पताल प्रशासन ने अस्थायी रूप से सामान्य मरीजों की भर्ती रोक दी है।

इजरायली आपातकालीन सेवा मैगन डेविड एडम ने बताया कि अब तक 40 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं, जबकि कई इमारतों में भारी नुकसान हुआ है।


🚨 नेतन्याहू की चेतावनी: ईरान को चुकानी होगी कीमत

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन हमलों को ‘आतंकवाद का कृत्य’ बताया और कहा कि ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:

“ईरान के आतंकी तानाशाह के सैनिकों ने नागरिकों और अस्पतालों को निशाना बनाया है। अब उन्हें इसकी पूरी कीमत चुकानी पड़ेगी।”


☢️ इजरायल ने फिर किया अराक रिएक्टर पर हमला

इजरायल ने जवाबी कार्रवाई में ईरान के अराक भारी जल रिएक्टर को फिर से निशाना बनाया। यह रिएक्टर ईरान के परमाणु कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाता है। रिएक्टर पर हमले से पहले इजरायली सेना ने नागरिकों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी थी। ईरानी टीवी ने पुष्टि की है कि हमले के समय रिएक्टर को पहले से खाली करा लिया गया था, जिससे रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है।


📊 अब तक कितनी मौतें और घायल?

  • ईरान में:
    वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स ग्रुप के अनुसार, अब तक

    • 639 लोग मारे गए

    • जिनमें से 263 आम नागरिक

    • 1,300+ लोग घायल

  • इजरायल में:

    • 24 लोगों की मौत

    • सैकड़ों घायल

    • मिसाइल और ड्रोन हमलों से मध्य इजरायल में रिहायशी इलाकों में नुकसान


🇮🇷 ईरान के सुप्रीम लीडर की चेतावनी

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका की किसी भी सैन्य भागीदारी को चेतावनी देते हुए कहा कि:

“ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा। अगर अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ, तो उसे अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ेगा।”


🔎 अब आगे क्या?

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह युद्ध यूरेनियम या प्लूटोनियम आधारित ठिकानों तक फैलता है, तो न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर असर पड़ेगा। अमेरिका इस युद्ध में प्रवेश को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।

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