इजराइल और ईरान के बीच तनाव के बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने न केवल उन्हें, बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। नेतन्याहू के अनुसार, ईरान ट्रंप को अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है और इसी कारण वह उन्हें “दुश्मन नंबर एक” के रूप में देखता है।
नेतन्याहू का दावा: ट्रंप पर दो बार हमले की साजिश
एक अमेरिकी मीडिया चैनल को दिए गए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने बताया कि ईरान ने ट्रंप की हत्या की दो असफल कोशिशें कीं, जिनमें उसकी छद्म ताकतें जैसे हिजबुल्ला और हमास शामिल थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अतीत में भी अमेरिका के खिलाफ हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया है—जैसे बेरुत में अमेरिकी सैनिकों पर हमला, इराक और अफगानिस्तान में सैन्य विरोध, वाशिंगटन में बम धमाके और अमेरिकी झंडों को जलाना।
ईरान का परमाणु खतरा
नेतन्याहू ने यह भी चेतावनी दी कि ईरान परमाणु हथियारों के निर्माण के बेहद करीब है। उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी के अनुसार ईरान महज एक महीने में परमाणु परीक्षण करने की स्थिति में था, और एक साल के भीतर वह परमाणु हथियार प्राप्त कर सकता है। यह पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
ट्रंप की रणनीति की सराहना
इजराइली प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के साथ कभी भी समझौते की कमजोर नीति नहीं अपनाई। यही वजह है कि ईरान उन्हें सबसे बड़ा खतरा मानता है। नेतन्याहू ने ट्रंप को “निर्णायक और मजबूत नेतृत्व वाला व्यक्ति” बताया, जिनके रहते ईरान को यूरेनियम संवर्धन का सीधा रास्ता नहीं मिल सका।
खुद को बताया ट्रंप का सहयोगी
नेतन्याहू ने खुद को ट्रंप का “जूनियर पार्टनर” कहते हुए कहा कि वह भी ईरान के निशाने पर थे। उन्होंने यह दोहराया कि अगर ईरान के हाथों में परमाणु हथियार लगते हैं, तो वह केवल इजराइल ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं। ऐसे में, वैश्विक समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह इस खतरे को गंभीरता से ले और उचित कदम उठाए।
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