तेहरान का कड़ा बयान – नेतन्याहू को बताया ‘अतिक्रमणकारी अपराधी’, आर्टिकल 51 के तहत जवाबी कार्रवाई का अधिकार मांगा
13 जून 2025 को, इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक तीखा और आक्रोशित बयान जारी किया। इस बयान में इजरायल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया गया।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल का यह कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है और यह ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर सीधा हमला है।
“अल्लाह के नाम पर हम चेतावनी देते हैं…” – ईरान का आधिकारिक बयान
बयान की शुरुआत इन शब्दों से हुई:
“अल्लाह के नाम पर, जो बहुत ही दयालु और कृपालु है… हमारी मातृभूमि पर हमला एक आपराधिक शासन द्वारा किया गया है, जिसने हमारे नागरिकों और वैज्ञानिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।”
तेहरान का आरोप है कि इजरायल ने ऑपरेशन “राइजिंग लॉयन” के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों और रिहायशी क्षेत्रों पर हमला किया। ईरान ने दावा किया कि इस हमले में उसके नागरिकों, रक्षा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की मौत हुई है।
जवाबी कार्रवाई की चेतावनी और UN से हस्तक्षेप की मांग
ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत उसे जवाबी सैन्य कार्रवाई करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। बयान में कहा गया:
“हम अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में किसी भी प्रकार की झिझक नहीं दिखाएंगे।”
इसके साथ ही ईरान ने यूएन महासचिव और सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की और सभी सदस्य देशों से इजरायल के खिलाफ सामूहिक निंदा और कार्रवाई का अनुरोध किया।
अमेरिका पर भी गंभीर आरोप
ईरान ने इस हमले के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका को भी जिम्मेदार ठहराया। विदेश मंत्रालय का कहना है कि इजरायल इतना बड़ा सैन्य ऑपरेशन अमेरिकी समन्वय के बिना नहीं कर सकता। ऐसे में अमेरिका को भी इस आक्रामकता के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
ईरान का यह रुख अब वैश्विक स्तर पर एक बड़ी कूटनीतिक लड़ाई का संकेत देता है। संयुक्त राष्ट्र की अगली प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्या यह तनाव और युद्ध की ओर बढ़ेगा या कोई राजनीतिक समाधान निकल पाएगा।
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