नई दिल्ली/तेहरान: इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच अब राजनयिक मोर्चे पर बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ईरान ने अमेरिका पर सीधा दबाव बनाते हुए कहा है कि अगर वॉशिंगटन सच में शांति चाहता है, तो उसे तत्काल निर्णायक कदम उठाने होंगे।
ईरान का दावा – एक कॉल काफी है नेतन्याहू को रोकने के लिए
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार (16 जून 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक कड़ा बयान देते हुए लिखा:
“वॉशिंगटन से सिर्फ एक फोन कॉल, नेतन्याहू को शांत करने के लिए पर्याप्त हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि यही कॉल कूटनीति की वापसी का रास्ता खोल सकती है और युद्ध विराम की शुरुआत बन सकती है।
“इजरायल की आक्रामकता रुकी नहीं तो जवाब भी जारी रहेगा”
अराघची ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सच में युद्ध रोकने और कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, तो उन्हें अब साहसिक और स्पष्ट निर्णय लेने होंगे। उन्होंने दोहराया कि अगर इजरायल के हमले बंद नहीं हुए, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान की खाड़ी देशों से अपील – शांति के लिए दबाव बनाएं
वर्तमान संकट को हल करने के प्रयासों के तहत, ईरान ने कतर, सऊदी अरब और ओमान से अपील की है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति से संपर्क कर इजरायल पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाएं।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यह संकेत भी दिया है कि अगर संघर्ष विराम की दिशा में कोई ठोस कदम उठता है, तो वह परमाणु वार्ता में लचीलापन दिखाने को तैयार है।
यह पहल मध्य पूर्व की राजनयिक समीकरणों में संभावित बदलाव की ओर संकेत कर रही है।
ट्रंप का तीखा जवाब – “ईरान को पहले ही मान जाना चाहिए था”
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक बार फिर सख्त हमला बोला। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर उन्होंने लिखा:
“ईरान को उस डील पर उसी वक्त साइन कर देना चाहिए था, जब मैंने कहा था। अब हालात शर्मनाक हैं और इसमें सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान जा रही है।”
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि
“ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।”
इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक समुदाय को चेताते हुए कहा कि
“सभी को जल्द से जल्द तेहरान छोड़ देना चाहिए।“
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