तेल अवीव:
ईरान और इज़राइल के बीच जारी हवाई संघर्ष के नौवें दिन, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने पिता प्रोफेसर बेंज़ियोन नेतन्याहू का एक पुराना भाषण साझा किया है। यह भाषण वर्ष 2010 में उनके 100वें जन्मदिन पर दिया गया था।
“यह अस्तित्व का प्रश्न है” – बेंज़ियोन नेतन्याहू
इस भाषण में बेंज़ियोन नेतन्याहू ने अपने बेटे और देश को चेताया था कि यहूदियों का अस्तित्व खतरे में है, और इसका सबसे बड़ा स्रोत है ईरान।
“हमारे शत्रु खुलेआम हमें समाप्त करने की धमकी दे रहे हैं। ईरान यदि परमाणु हथियार हासिल करता है, तो वह ज़ायोनिज़्म (यहूदी राष्ट्रवाद) को मिटा सकता है।”
उन्होंने कहा कि इज़राइली जनता डरने की बजाय साहस और विवेक के साथ इस चुनौती का सामना कर रही है:
“जो राष्ट्र अस्तित्व के संकट से गुजर रहा हो, उसे शांत चित्त से खतरे को देखना चाहिए, और जब जीत की संभावना हो, तो निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।”
“समझौते नहीं, केवल शक्ति”
पूर्व इतिहासकार और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रह चुके नेतन्याहू वरिष्ठ का मानना था कि इज़राइल को अपनी रक्षा के लिए फिलिस्तीनियों से किसी तरह के समझौते या वार्ता नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा:
“अरब प्रकृति से किसी समझौते या समाधान के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उनके साथ केवल शक्ति ही एकमात्र रास्ता है।”
यह बयान उस समय फिर से प्रासंगिक हो गया है जब ईरान और इज़राइल के बीच का युद्ध एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य: युद्ध और अमेरिका की भूमिका
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बेंजामिन नेतन्याहू सरकार द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर किए गए हमले से यह टकराव शुरू हुआ था।
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इज़राइल का दावा है कि यह कार्रवाई ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जरूरी थी।
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जवाब में, ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे दोनों पक्षों में भारी जनहानि हुई है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह फिलहाल इस युद्ध में सीधे शामिल होने के बजाय कूटनीतिक विकल्पों को प्राथमिकता देंगे।
नेतन्याहू का संदेश: इतिहास की चेतावनी
बेंज़ियोन नेतन्याहू के शब्द इज़राइल के लिए सिर्फ अतीत की याद नहीं हैं, बल्कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए आज की रणनीति का भी नैतिक आधार बन रहे हैं।
उनके अनुसार,
“हमारे लोग पहले भी चुनौतियों से लड़े हैं, और आज भी उसी साहस के साथ इस खतरे को हटा देंगे।”
निष्कर्ष:
जैसे-जैसे इज़राइल-ईरान संघर्ष तेज हो रहा है, नेतन्याहू परिवार का यह संदेश यहूदियों के सामूहिक मनोबल, अस्तित्व की चिंता और आक्रामक कूटनीति की झलक देता है।
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