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IAEA के डायरेक्टर जनरल राफाएल ग्रोसी

ईरान पर हमलों के बाद UN एजेंसी ने मांगी तात्कालिक परमाणु जांच की अनुमति

वियना:
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने कहा है कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि उनके निरीक्षक ईरान के उन परमाणु ठिकानों तक फिर से पहुंच सकें, जो हाल ही में अमेरिका और इज़राइल के हमलों का निशाना बने हैं।

“सबसे जरूरी काम है निरीक्षण बहाल करना”

ऑस्ट्रिया में आयोजित एक सुरक्षा सम्मेलन में प्रेस वार्ता के दौरान IAEA के महानिदेशक ग्रोसी ने कहा,

हमारा प्राथमिक उद्देश्य यही है कि हम अपने निरीक्षकों को ईरान के परमाणु संयंत्रों में दोबारा भेजें और यह पता लगाएं कि हमलों से क्या क्षति हुई है और समृद्ध यूरेनियम का भंडार कहां तक सुरक्षित है।

ईरान के तीन प्रमुख ठिकानों—जहां 13 जून तक यूरेनियम संवर्धन का कार्य जारी था—पर इज़राइल के हमलों के बाद, IAEA को निरीक्षण की अनुमति नहीं दी गई है।


ईरान से मिला पत्र, लेकिन स्पष्टता नहीं

ग्रोसी के अनुसार, ईरान ने 13 जून को एक पत्र भेजा था जिसमें कहा गया कि वह अपने परमाणु उपकरणों और सामग्री को बचाने के लिए “विशेष कदम” उठा रहा है।

हालांकि ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह ‘विशेष कदम’ क्या हैं, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि उन्होंने यूरेनियम भंडार को कहीं सुरक्षित रखा है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ओर से यह नहीं बताया गया कि लगभग 60% शुद्धता तक संवर्धित यूरेनियम—जो हथियार-योग्य स्तर के काफी करीब है—का क्या हाल है।
ग्रोसी ने कहा,

हमें अनुमान है कि अधिकतर सामग्री अब भी मौजूद है। लेकिन यह केवल मौके पर जाकर जांच के बाद ही तय हो पाएगा।


संदर्भ: ईरान-इज़राइल टकराव और अमेरिका की भूमिका

बता दें कि 13 जून को इज़राइल ने ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर हमला किया था, जिसके बाद अमेरिका ने भी सैन्य कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद गोपनीय रवैया अपना लिया है।

IAEA निरीक्षकों की गैर-हाजिरी से यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं ईरान अपने संवर्धन कार्य को आगे बढ़ा न रहा हो, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है।


निष्कर्ष

IAEA प्रमुख का यह बयान न केवल परमाणु सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि क्षेत्रीय संकट अब वैश्विक निगरानी तंत्र को भी सीधे प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान IAEA को कितना सहयोग देता है।

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