ईरान और इसराइल के बीच जारी तनाव के बीच करीब 4,000 भारतीय छात्र इस समय ईरान में फंसे हुए हैं। हवाई मार्ग बंद होने के कारण उनकी भारत वापसी कठिन हो गई है। इनमें से अधिकांश छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं, जो या तो मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं या फिर धार्मिक शिक्षा लेने गए हैं।
🧳 क्यों जाते हैं भारतीय छात्र ईरान?
📚 सस्ती मेडिकल शिक्षा
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कई छात्रों ने भारत में नीट परीक्षा दी थी, लेकिन सीट न मिलने पर उन्होंने ईरान की मेडिकल यूनिवर्सिटीज़ का रुख किया।
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यहाँ की कुल एमबीबीएस फीस लगभग 15–30 लाख रुपये है, जो बांग्लादेश या अन्य देशों की तुलना में काफी कम है।
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प्रमुख मेडिकल संस्थानों में शामिल हैं:
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ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (तेहरान)
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इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी
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शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी
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केरमान यूनिवर्सिटी
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🕌 धार्मिक शिक्षा
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शिया समुदाय के बच्चे क़ुम और मशहद जैसे शहरों में धार्मिक शिक्षा लेने जाते हैं।
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इन शिक्षाओं के लिए अक्सर ईरानी सरकार द्वारा खर्च वहन किया जाता है।
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क़ुम शहर, जो तेहरान से लगभग 150 किमी दूर है, धार्मिक शिक्षा का वैश्विक केंद्र माना जाता है।
🚨 वर्तमान स्थिति: छात्रों की सुरक्षा और स्थानांतरण
भारत सरकार और ईरान में स्थित भारतीय दूतावास सक्रिय हैं और हालात पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं।
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तेहरान से छात्रों को निकालकर सुरक्षित स्थानों जैसे क़ुम शहर में ले जाया गया है।
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कई छात्रों को अर्मेनिया के सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया गया है।
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छात्रों की सहायता के लिए हेल्प सेंटर और संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं।
रौनक अशरफ़, जो तेहरान यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा हैं, ने बताया कि वे अब क़ुम में हैं। उन्होंने कहा, “हम सोमवार सुबह तेहरान से रवाना हुए थे। यहां करीब 1,000 छात्र मौजूद हैं।”
🧾 पारिवारिक चिंता और स्थानीय प्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और कुपवाड़ा जैसे इलाकों से ताल्लुक रखने वाले छात्रों के परिजनों ने प्रदर्शन कर सरकार से बच्चों की वापसी की मांग की है।
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गुलाम मुहिद्दीन, जिनकी बेटी नूर मुंतहा ईरान में पढ़ रही हैं, ने कहा:
“दूतावास उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गया है, लेकिन हमें नहीं पता कहां।”
📉 तेहरान और अन्य शहरों के हालात
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छात्रों के अनुसार, तेहरान में कुछ हमलों की आवाजें और घटनाएं हुईं, लेकिन शिक्षण संस्थान और सामान्य जीवन धीरे-धीरे प्रभावित हुए।
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क़ुम और मशहद जैसे शहरों में हालात फिलहाल सामान्य हैं।
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मोहम्मद फ़रज़ान रिज़वी, जो क़ुम में पिछले नौ वर्षों से पढ़ाई कर रहे हैं, ने बताया:
“बाजार, स्कूल सब सामान्य हैं। खतरे जैसा कुछ नहीं।”
🛂 सरकारी दिशा-निर्देश
भारतीय दूतावास ने सार्वजनिक रूप से सभी नागरिकों से कहा है कि:
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यदि संभव हो तो तेहरान से किसी सुरक्षित स्थान पर जाएं।
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जो छात्र या नागरिक अभी भी तेहरान में हैं और दूतावास के संपर्क में नहीं हैं, वे अपनी लोकेशन और संपर्क विवरण भेजें।
📌 निष्कर्ष: एक संवेदनशील स्थिति, एक गंभीर जिम्मेदारी
ईरान में भारतीय छात्र कम लागत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने की आशा में जाते हैं। लेकिन मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता के चलते उनकी सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।
अब यह भारत सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह राजनयिक माध्यमों से उनके लिए सुरक्षित वापसी के मार्ग सुनिश्चित करे और छात्रों के भविष्य को स्थिर बनाए रखे।
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