वॉशिंगटन / नई दिल्ली — हालिया सैन्य संघर्षों के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच परदे के पीछे बातचीत जारी है। अमेरिकी अधिकारियों और मध्य पूर्व के राजनयिकों ने ईरानी प्रतिनिधियों से गुप्त वार्ताएं की हैं, जिनका उद्देश्य तेहरान को परमाणु वार्ता की मेज़ पर वापस लाना है।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है जिसमें कुछ आकर्षक प्रावधान शामिल हैं:
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$20-30 अरब डॉलर का निवेश, जो ईरान की नागरिक परमाणु ऊर्जा संरचना को मजबूत करने के लिए किया जाएगा — बिना यूरेनियम संवर्धन (enrichment) की अनुमति के।
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प्रतिबंधों में कुछ हद तक ढील, जो कि तेहरान की आर्थिक स्थिति को सुधार सकता है।
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$6 अरब डॉलर की फ्रीज़ की गई संपत्तियों तक पहुंच, जो विभिन्न विदेशी खातों में अटकी पड़ी हैं।
फोर्डो साइट को ‘पुनर्निर्मित’ करने का प्रस्ताव
संभावनाओं में यह भी शामिल है कि हाल में अमेरिकी हमलों से प्रभावित फोर्डो परमाणु केंद्र को एक गैर-संवर्धन नागरिक केंद्र में बदला जा सकता है। इस परियोजना को खाड़ी के अमेरिका-समर्थित देशों द्वारा वित्तपोषित किया जा सकता है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में इस साइट का संचालन ईरान द्वारा ही किया जाएगा या नहीं।
ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने CNN से कहा, “हम इन वार्ताओं का नेतृत्व करने को तैयार हैं। कोई तो इस नए कार्यक्रम को फंड करेगा, लेकिन यह ज़िम्मेदारी अमेरिका नहीं उठाएगा।”
ट्रंप की असमंजस: समझौता ज़रूरी है या नहीं?
नाटो सम्मेलन के दौरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “हमें कोई समझौता चाहिए या नहीं, मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता।” हालांकि उनके कुछ सहयोगियों का मानना है कि एक दीर्घकालिक परमाणु समझौता मौजूदा संघर्षविराम को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है।
व्हाइट हाउस के विशेष मध्य पूर्व दूत, स्टीव विटकॉफ, ने CNBC से कहा कि अमेरिका “व्यापक शांति समझौते” की दिशा में काम कर रहा है और ईरान के सामने एक औपचारिक प्रस्ताव पेश करने की योजना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी नए कार्यक्रम की रूपरेखा यूएई के नागरिक परमाणु मॉडल की तरह होगी, जिसमें संवर्धन की अनुमति नहीं है।
बातचीत का अगला दौर?
कतर, जो कि इस्राइल-ईरान संघर्षविराम के प्रमुख मध्यस्थों में से एक रहा है, आने वाली वार्ताओं की मेज़बानी करता रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक पांच दौर की अप्रत्यक्ष बातचीत हो चुकी है, जबकि छठा दौर इस्राइली हमलों के कारण स्थगित हो गया था।
ट्रंप ने अंत में कहा:
“हो सकता है हम कोई समझौता कर लें, हो सकता है न करें। अगर वे कह दें कि वो परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, तो शायद हम आगे बढ़ सकते हैं।”
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