एरिज़ोना / न्यू दिल्ली:
अमेरिका के एरिज़ोना राज्य में एक 76 वर्षीय पादरी की क्रूस पर चढ़ाकर हत्या करने वाले आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जेल में दिए एक इंटरव्यू में 51 वर्षीय एडम क्रिस्टोफ़र शीफ़ ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत थी — उसका लक्ष्य कुल 15 धार्मिक नेताओं को मारने का था।
शीफ़ ने FOX 10 को दिए इंटरव्यू में स्वीकार किया कि उसने पादरी बिल शोनमैन की हत्या की, जो न्यू रिवर बाइबल चैपल के प्रमुख थे। यह घटना अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हुई थी।
पुलिस के अनुसार, पादरी का शव उनके बेडरूम में मिला था — हाथ दीवार से बांधे गए थे और शरीर की मुद्रा क्रूस जैसी थी। उनके सिर पर कांटों का ताज भी पाया गया, जिसे आरोपी ने जंगल से इकट्ठा किए गए पौधों से बनाया था।
‘ऑपरेशन फर्स्ट कमांडमेंट’: उसका मिशन क्या था?
शीफ़ ने दावा किया कि वह “ईसा मसीह को झूठा मसीहा” मानता है और चर्चों को “लोगों को गुमराह करने वाला संस्थान” बताता है। उसने अपनी कथित योजना को नाम दिया था — “ऑपरेशन फर्स्ट कमांडमेंट” — जिसके तहत वह अलग-अलग धार्मिक नेताओं को निशाना बना रहा था।
उसका कहना था कि वह 14 अन्य पादरियों और धार्मिक नेताओं को भी “सजा” देने वाला था, और उसकी सूची में विभिन्न धर्मों के लोग शामिल थे।
अगला निशाना था फीनिक्स के दो पादरी
पुलिस ने बताया कि शोनमैन की हत्या के बाद शीफ़ सेडोना के चैपल ऑफ द होली क्रॉस पहुंचा, जहां वह दो और पादरियों को मारने की फिराक में था। लेकिन वहीं एक ब्रेक-इन की सूचना के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
फिलहाल आरोपी कोकोनीनो काउंटी जेल में बंद है और उस पर फर्स्ट डिग्री मर्डर का मामला दर्ज किया गया है।
माफी नहीं, “भगवान का कानून” बताया आधार
एक अन्य इंटरव्यू में, शीफ़ ने साफ कहा कि वह अपने किए पर पछतावा नहीं करता। उसका दावा है कि वह “ईश्वर के आदेश” पर काम कर रहा था और उसने जो किया, उसे “पवित्र न्याय” मानता है।
पुलिस और जनता में खलबली
इस घटना ने न सिर्फ एरिज़ोना बल्कि पूरे अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई धार्मिक संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कड़ी सुरक्षा की मांग की है।
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