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ई-मित्र पोर्टल के माध्यम से निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए लॉटरी सूची जारी की जाती है। इस सूची में विद्यार्थियों का प्रवेश वरीयता क्रमांक भी दिया जाता है। इसलिए स्कूल लॉक करते समय अभिभावकों को ध्यान रखना चाहिए कि वरीयता क्रम में कम नंबर वाले स्कूल का चयन करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
रिपोर्टिंग के समय क्या करें
जब अभिभावक बच्चे के साथ स्कूल में रिपोर्टिंग के लिए जाएं, तो वहां के स्कूल प्रशासन से यह जरूर पूछें कि स्कूल में कुल कितनी नि:शुल्क सीटें उपलब्ध हैं। इससे अभिभावक मेरिट क्रम के आधार पर अपने बच्चे की स्थिति समझ सकते हैं।
नहीं हुआ प्रवेश तो मिलेगा दूसरा मौका
यदि पहली बार स्कूल लॉक करने और रिपोर्टिंग के बाद भी बच्चे का नि:शुल्क सीट पर प्रवेश नहीं हो पाता, तो कुछ दिनों बाद अभिभावकों को दूसरे स्कूल के लिए भी लॉक लगाने का विकल्प दिया जाएगा।
इसके लिए अभिभावकों को ई-मित्र केंद्र से संपर्क में रहना होगा और मोबाइल पर आने वाले एसएमएस संदेशों पर ध्यान देना होगा।
दूसरी लॉटरी सूची भी होगी जारी
अगर किसी बच्चे का नाम पहली लॉटरी सूची में नहीं आता, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद दूसरी लॉटरी सूची भी जारी की जाएगी।
महत्वपूर्ण तिथियां
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पोर्टल पर स्कूल चयन की अंतिम तिथि: 16 मार्च
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प्रथम आवंटन (पहली लॉटरी): 17 मार्च
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विद्यालय द्वारा दस्तावेज सत्यापन: 16 मार्च से 25 मार्च
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परिवेदनाओं का निस्तारण: 17 मार्च से 2 अप्रैल
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प्रवेश का दूसरा चरण: 7 अप्रैल से शुरू
कितने स्कूलों में हो रही प्रवेश प्रक्रिया
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382 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक निजी स्कूल
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194 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक निजी स्कूल
इन कक्षाओं में हो रहा है प्रवेश
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नर्सरी: लगभग 3 से 4 वर्ष
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एलकेजी: लगभग 4 से 5 वर्ष
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यूकेजी: लगभग 5 से 6 वर्ष
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कक्षा 1: लगभग 6 से 7 वर्ष
अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे समय पर स्कूल चयन करें, ई-मित्र केंद्र से संपर्क बनाए रखें और मोबाइल पर आने वाले संदेशों को ध्यान से देखें, ताकि बच्चे के प्रवेश की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो सके।
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