प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने की तैयारी के बीच सीया (राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघान निर्धारण प्राधिकरण) का नया आदेश उद्यमियों के लिए चिंता का सबब बन गया है।
क्या है मामला
सीया ने तय किया है कि एनवायरनमेंट क्लियरेंस (ईसी) मिलने से पहले प्रोजेक्ट शुरू करने वाले उद्यमियों को पौधरोपण की कुल लागत के बराबर बैंक गारंटी जमा करनी होगी।
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हर पौधे के लिए 2,000 रुपए की गारंटी।
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गारंटी 5 साल के लिए वैध।
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केवल तब रिलीज होगी जब पौधारोपण पूरा हो और सर्टिफाइड कंप्लायंस रिपोर्ट मिल जाए।
उद्यमियों की चिंता
उद्योग जगत का कहना है कि यह नीति ‘सजा पहले, गुनाह बाद में’ जैसी है।
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ईसी मिलने के बाद ही प्रोजेक्ट पर पर्यावरण नियम लागू होते हैं।
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नियम न मानने पर ईसी रद्द की जा सकती है, इसलिए पहले से भारी बैंक गारंटी लेना अनुचित है।
अव्यावहारिक शर्त
कंप्लायंस रिपोर्ट फिलहाल केवल कुछ मामलों में ही मिलती है।
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नई इकाइयों के लिए बैंक गारंटी रिलीज करवाना मुश्किल होगा।
उद्यमियों की मांग
मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स ने मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्रालय से कहा है कि
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इस आदेश की समीक्षा की जाए।
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निवेश बढ़ाने के लिए बैंक गारंटी की यह अनिवार्य शर्त हटाई जाए।
उद्योग जगत का मानना है कि इस आदेश के कारण नए प्रोजेक्ट्स की वित्तीय व्यवहार्यता प्रभावित होगी और प्रदेश में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है।
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