यरुशलम/तेहरान/वियना: पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-इज़राइल संघर्ष को लेकर अचानक एक ऐसा बयान सामने आया जिसने पूरी लड़ाई की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह बयान दिया है इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफाएल मारियानो ग्रोसी ने, जिन्होंने स्पष्ट कहा कि “ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है”।
यह वही संस्था है जिसकी पुरानी रिपोर्टों को आधार बनाकर इज़राइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की शुरुआत की थी।
🔁 बदल गया युद्ध का नैरेटिव
पिछले आठ दिनों से जारी जंग में इज़राइल का दावा यही रहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के ज़रिए हथियार बनाने के बेहद करीब पहुंच चुका है। लेकिन जब CNN को दिए इंटरव्यू में ग्रोसी ने कहा कि IAEA को इस तरह की कोई पुष्ट जानकारी नहीं है, तो यह बयान जंग के पूरे आधार को कमजोर कर गया।
अब नेतन्याहू की आलोचना होने लगी है कि क्या उन्होंने एक झूठे खतरे को आधार बनाकर संघर्ष छेड़ा?
👤 कौन हैं राफाएल ग्रोसी?
राफाएल ग्रोसी अर्जेंटीना के एक वरिष्ठ और अनुभवी राजनयिक हैं, जो दिसंबर 2019 से IAEA के प्रमुख पद पर कार्यरत हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु अप्रसार और कूटनीति के क्षेत्र में उन्हें 40 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
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वे ऑस्ट्रिया में अर्जेंटीना के राजदूत रह चुके हैं।
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IAEA के अलावा OPCW (ऑर्गनाइजेशन फॉर द प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वेपन्स) और NSG जैसे संगठनों में भी वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।
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उनके पास अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी है और उन्हें विभिन्न देशों से प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
📜 IAEA से पहले का कूटनीतिक सफर
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2010–2013: IAEA में पॉलिसी डिवीजन के असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल रहे।
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OPCW में वरिष्ठ सलाहकार की भूमिका में रहे।
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उन्होंने बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग और NATO जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी अर्जेंटीना का प्रतिनिधित्व किया।
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2023 में इटली की राजधानी रोम ने उन्हें “ऑनरेरी सिटीजन” की उपाधि दी।
🇮🇷 ईरान की नाराज़गी भी आई सामने
हालाँकि ग्रोसी के ताज़ा बयान ने इज़राइल की स्थिति को असहज कर दिया है, लेकिन ईरान भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। तेहरान का कहना है कि अगर यह स्थिति पहले स्पष्ट होती, तो सैकड़ों निर्दोष जानें बच सकती थीं।
पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने ग्रोसी पर परोक्ष रूप से हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा कि “IAEA की पहले की रिपोर्टों ने डर का माहौल पैदा किया, जिससे इज़राइल को हमला करने का बहाना मिल गया।” उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी की ‘मौन सहमति’ और गलत संकेतों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की साख को नुकसान पहुँचाया है।
🧭 क्या नेतन्याहू ने ग़लत जानकारी पर युद्ध छेड़ा?
नेतन्याहू लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को इज़राइल के लिए सीधा खतरा बताते रहे हैं। लेकिन अब, जब IAEA ने सार्वजनिक रूप से कोई खतरा न होने की बात कही है, तो यह सवाल उठ रहा है:
क्या यह युद्ध एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था?
क्या ग्रोसी का बयान इस संघर्ष को नई दिशा दे सकता है?
🔍 निष्कर्ष
राफाएल ग्रोसी का बयान सिर्फ एक तकनीकी आकलन नहीं, बल्कि एक ऐसे मोड़ की तरह सामने आया है जो एक भयंकर युद्ध की नैतिकता, रणनीति और कूटनीतिक वैधता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। अब दुनिया की निगाहें इस पर हैं कि क्या नेतन्याहू को जवाब देना पड़ेगा, और क्या ईरान इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी छवि सुधारने के लिए इस्तेमाल करेगा।
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