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एमपी के तालाब होंगे और सुंदर, बैंगलुरू की क्यालासनहल्ली झील जैसा होगा कायाकल्प

उज्जैन: उज्जैन जिले के तालाबों को बैंगलुरू की क्यालासनहल्ली झील के मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। यह प्रक्रिया सीमेंट-कांक्रीट के बजाय प्राकृतिक तरीके से की जाएगी, जिससे तालाबों का मूल स्वरूप लौटेगा और उनका प्राकृतिक सौंदर्य बना रहेगा।

🔹 तालाबों के कायाकल्प की पहल

  • उज्जैन में गंदगी से भरे तालाबों को फिर से संवारने की योजना बनाई गई है।
  • तालाबों को मिट्टी, पानी और पेड़-पौधों से प्राकृतिक रूप से विकसित किया जाएगा।
  • सीमेंट और लोहे के स्ट्रक्चर की बजाय तालाबों को पारंपरिक तरीके से पुनर्जीवित किया जाएगा।

🔹 कार्यशाला में दी गई जानकारी

  • उज्जैन में गंगा जल संवर्धन कार्यशाला का आयोजन हुआ।
  • झील पुरुष आनंद मल्लिगावड़ ने सरपंचों और पंचायत सचिवों को तालाबों के प्राकृतिक विकास की जानकारी दी।
  • उन्होंने कहा, प्रकृति से सुंदर कुछ भी नहीं है, हमें सिर्फ नेचर को री-स्टोर करना है।

🔹 तालाबों की सफाई और संरक्षण

  • तालाबों को चाय की प्लेट के आकार में गहरा किया जाएगा, ताकि सभी के लिए यह सुरक्षित रहे।
  • तालाबों में सीवरेज का पानी बिल्कुल नहीं मिलना चाहिए, वरना पानी प्रदूषित हो जाएगा।
  • झीलों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर गंदे पानी को प्राकृतिक रूप से फिल्टर कर नदी में छोड़ा जाएगा।
  • 60-70% तालाब का हिस्सा वर्षा जल से भरा जाएगा।

🔹 कम खर्च में तालाबों का पुनर्जीवन

  • सरकार आमतौर पर 1 एकड़ तालाब के विकास में 50 लाख से 1 करोड़ रुपए खर्च करती है।
  • आनंद मल्लिगावड़ के मॉडल में मात्र 5 से 10 लाख रुपए प्रति एकड़ खर्च आता है।
  • उन्होंने 36 एकड़ की क्यालासनहल्ली झील को 95 लाख रुपए में सिर्फ 45 दिनों में पुनर्जीवित किया था।

🔹 उज्जैन में भी होगी यह पहल

  • जिला पंचायत तालाबों का सर्वे कर उनकी स्थिति देख रही है।
  • चिन्हित तालाबों का निरीक्षण करने के लिए आनंद मल्लिगावड़ उज्जैन आ सकते हैं।
  • जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह ने बताया कि उनकी टीम भी इसी मॉडल पर काम कर रही है।

🔹 जल संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित किया गया

  • कार्यशाला में दिखाए गए वीडियो में बताया गया कि हमारे पूर्वज नदी में पानी देखते थे, पिता ने कुएं में, हम नल में और हमारे बच्चे बोतल में पानी देख रहे हैं।
  • यदि अभी जल संरक्षण के लिए काम नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ी की आंखों में ही पानी बचेगा।

इस पहल से उज्जैन के तालाब फिर से जीवंत और खूबसूरत बन सकेंगे, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होगा।

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