नई दिल्ली:
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच हाल ही में ईरान और इज़राइल के बीच 12 दिनों तक चले टकराव के बाद क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई।
डॉ. जयशंकर ने इस मुश्किल समय में ईरान में फंसे सैकड़ों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए अराग़ची का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
“आज दोपहर ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची से बात की। मौजूदा जटिल स्थिति को लेकर ईरान के दृष्टिकोण को साझा करने के लिए उनका धन्यवाद।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में मदद के लिए उनका आभार।”
ईरान-इज़राइल संघर्ष और अमेरिका की भूमिका
बातचीत ऐसे समय में हुई जब हाल ही में अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी, जिससे ईरान और इज़राइल के बीच तनाव और तेज़ हो गया था। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम की घोषणा की, जो फिलहाल लागू है।
भारत की स्थिति: संवाद और कूटनीति को रास्ता मानता है
भारत सरकार ने इस संघर्ष पर लगातार नजर रखी है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा:
“हम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों पर रेडिएशन से जुड़ी रिपोर्टों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि IAEA के अनुसार, अब तक के मूल्यांकन में जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहां या तो परमाणु सामग्री नहीं थी या सिर्फ बहुत कम मात्रा में थी, और रेडियोधर्मी प्रदूषण सीमित इमारतों तक ही रहा।
“हम क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति की वापसी का आह्वान करते हैं,” उन्होंने कहा।
भारत ने मंगलवार को ईरान-इज़राइल के बीच संघर्षविराम का स्वागत किया था और यह भी दोहराया कि पश्चिम एशिया में स्थायी सुरक्षा और शांति भारत की प्राथमिकता है।
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