नई दिल्ली: भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव से अब भी पाकिस्तान उबर नहीं पाया है। यही कारण है कि अब वह फर्जी दावों के सहारे अपनी पराजय को छुपाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने हाल ही में दावा किया कि उन्होंने भारत के अत्याधुनिक सुखोई-30MKI फाइटर जेट्स और S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया है। लेकिन जैसे ही विशेषज्ञों ने तथ्यों की जांच शुरू की, इन दावों की हकीकत सामने आ गई।
📍 आदमपुर एयरबेस पर हमले का झूठ
पाकिस्तानी मीडिया ने कहा कि भारत के आदमपुर एयरबेस पर स्थित एक सुखोई-30MKI जेट को मिसाइल हमले में तबाह कर दिया गया। उपग्रह से प्राप्त छवि में एक विमान के पास काले धब्बे नजर आए, जिसे नुकसान के रूप में पेश किया गया। लेकिन जांच में यह धब्बे नियमित इंजन टेस्टिंग की कालिख निकली, और जेट असल में मिग-29 था। यानी हमला तो दूर, तस्वीर भी पुरानी थी।
📍 S-400 पर भी झूठा वार
भुज में भारत के S-400 डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने का दावा भी झूठा और मनगढ़ंत निकला। जिस सैटेलाइट इमेज में कथित काले निशान दिखाए गए, वे असल में वाहन मरम्मत क्षेत्र में फैले तेल के दाग थे। विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि यह तस्वीर किसी भी हमले से पहले की है।
📍 जाली तस्वीरों से भ्रम फैलाने की कोशिश
पाकिस्तान द्वारा नलिया, आदमपुर, श्रीनगर और जम्मू के एयरबेस पर किए गए कथित हमलों के लिए जिन छवियों का सहारा लिया गया, उनमें या तो एडिटिंग की गई थी या पुरानी तस्वीरों का गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि क्लाउड शैडो यानी बादलों की छाया को भी विस्फोट का असर बताया गया।
🛰️ विशेषज्ञों की पुष्टि
प्रसिद्ध जियो-इंटेलिजेंस विश्लेषक डेमियन साइमन और उनकी टीम ने इन फर्जी तस्वीरों की असलियत उजागर की। उन्होंने बताया कि कैसे चीनी सैटेलाइट फर्मों की तस्वीरों में बदलाव कर पाकिस्तानी सोशल मीडिया भारत पर ‘सफल’ हमलों का भ्रम पैदा कर रहा है।
🇮🇳 भारत की ओर से स्पष्ट जवाब
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद आदमपुर एयरबेस का दौरा कर चुके हैं, जो स्पष्ट करता है कि भारत की सैन्य संरचनाओं को कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके उलट, पाकिस्तान के जैकोबाबाद और भोलारी जैसे एयरबेस पर भारतीय हमलों की स्पष्ट छाप उपग्रह तस्वीरों में दिखाई दे रही है — मसलन तिरपाल से ढंके हुए हैंगर और क्षतिग्रस्त संरचनाएं।
🎖️ फील्ड मार्शल की पदवी या दिखावा?
आश्चर्य की बात यह है कि पाकिस्तान ने केवल चार दिन की सैन्य झड़प के बाद सेनाध्यक्ष असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बना दिया। यह फैसला न केवल पाकिस्तान की जनता बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी हैरानी का विषय बना। असल में, यह कदम शायद इसलिए उठाया गया ताकि पाकिस्तान की जनता को भ्रम में रखा जा सके और सेना के खिलाफ बढ़ते गुस्से को दबाया जा सके।
❗ निष्कर्ष
पाकिस्तान ने जो भी दावा किया, वह या तो झूठा निकला या झूठ के सहारे गढ़ा गया। उसका यह दुष्प्रचार अभियान यह दिखाता है कि वह न तो अपनी हार को स्वीकार कर पा रहा है और न ही सच्चाई को सामने आने देना चाहता है। भारत की सैन्य शक्ति के सामने पाकिस्तान की रणनीतियां बार-बार धराशायी हुई हैं — और यह नया उदाहरण उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।
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