इस्लामाबाद | 20 जून 2025
भारत द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पाकिस्तान की ओर से सीज़फायर को लेकर एक बड़ा कबूलनामा सामने आया है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने जिओ टीवी को दिए एक इंटरव्यू में इस बात की पुष्टि की है कि भारत द्वारा नूरखान और शोरकोट एयरबेस पर दोबारा किए गए हमले के बाद ही पाकिस्तान ने युद्धविराम के लिए हामी भरी।
“हम हमला करने ही वाले थे, भारत ने पहले कर दिया” – इशाक डार
डार ने खुलासा किया कि पाकिस्तान ने भारत के ख़िलाफ़ एक जवाबी सैन्य अभियान की योजना बना ली थी, जो सुबह 4 बजे शुरू किया जाना था।
लेकिन, उनके मुताबिक़, भारत ने उससे पहले ही रात 2:30 बजे दोबारा हमला कर दिया और प्रमुख एयरबेस जैसे नूरखान और शोरकोट को निशाना बनाया।
“हमारी योजना पूरी तैयार थी, फोर्सेज अलर्ट थीं… लेकिन भारत ने हमें एक बार फिर चौंका दिया,” – इशाक डार, उप-प्रधानमंत्री, पाकिस्तान
सीज़फायर में सऊदी अरब की भूमिका
इशाक डार ने इंटरव्यू में बताया कि भारत के हमले के करीब 45 मिनट बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान का फोन आया।
फैसल ने पूछा, “क्या मैं भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से संपर्क कर सकता हूं?”
डार ने कहा, “मैंने उन्हें हां कहा… और उन्होंने तुरंत जयशंकर से बात की।”
इशाक डार ने माना कि सऊदी अरब की इस पहल के बाद ही पाकिस्तान सीज़फायर को लेकर बातचीत के लिए राज़ी हुआ।
“क्रेडिट लेना है तो ले लें, हमें ऐतराज़ नहीं” – डार
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस सीज़फायर के लिए मध्यस्थता का श्रेय सऊदी अरब को दिया जाना चाहिए, डार ने कहा:
“अगर वो 13 बार या 130 बार क्रेडिट लेना चाहें तो हमें उससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अपनी भूमिका निभाई और बात बनी।”
क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
भारत की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक एक गुप्त हवाई कार्रवाई की गई थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान के सामरिक ठिकानों को निशाना बनाना था।
सूत्रों के अनुसार:
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नूरखान एयरबेस और शोरकोट एयरबेस पर प्रिसिशन स्ट्राइक की गई
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कार्रवाई का समय जानबूझकर रात के ढाई बजे रखा गया, ताकि पाकिस्तान की तैयारियों को बाधित किया जा सके
इस कार्रवाई के बाद ही पाकिस्तान का रुख रक्षात्मक होता गया और अंततः सीज़फायर की ओर झुकाव बढ़ा।
निष्कर्ष: भारत की रणनीति सफल?
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत ने सैन्य स्तर पर न केवल बढ़त ली, बल्कि राजनयिक दबाव के माध्यम से भी पाकिस्तान को संवाद की मेज़ पर आने के लिए मजबूर किया।
इशाक डार का यह कबूलनामा इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान ने सीज़फायर की पेशकश तब की, जब उसकी सामरिक स्थिति कमजोर हो रही थी।
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