संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क – पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो ज़रदारी को भारत पर झूठे आरोप लगाना उस समय भारी पड़ गया जब एक विदेशी पत्रकार ने उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच ही तथ्यों से घेर लिया।
दरअसल, बिलावल भुट्टो ने दावा किया था कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत में “मुसलमानों को राक्षसी रूप में पेश किया जा रहा है”। लेकिन जैसे ही उन्होंने यह टिप्पणी की, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद एक विदेशी पत्रकार ने उन्हें तुरंत टोकते हुए हकीकत सामने रख दी।
पत्रकार ने शांत लेकिन सटीक लहजे में कहा—
“मैंने ऑपरेशन सिंदूर पर भारत और पाकिस्तान दोनों की आधिकारिक ब्रीफिंग देखी है। भारत की ओर से जिस अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी थी, वह एक मुस्लिम महिला सैन्य अधिकारी थीं — कर्नल सोफिया कुरेशी।”
इस तथ्य ने बिलावल को निरुत्तर कर दिया। वो ना तो अपनी बात का खंडन कर सके, ना ही उसे सही साबित करने की कोशिश कर पाए। उन्होंने सिर्फ सिर हिलाते हुए कहा, “जहां तक ऑपरेशन की बात है, आप सही कह रहे हैं।”
जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर पर भारत की ओर से जो संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग हुई थी, उसका नेतृत्व दो वरिष्ठ महिला सैन्य अफसरों ने किया था —
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कर्नल सोफिया कुरेशी, भारतीय सेना के सिग्नल कोर से
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विंग कमांडर व्योमिका सिंह, भारतीय वायुसेना की हेलिकॉप्टर पायलट
इन दोनों अफसरों के साथ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री भी मौजूद थे।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि भारत की सैन्य और प्रशासनिक संरचना विविधता और समावेशिता की मिसाल है — और ऐसे झूठे दावों से उसका सच दबाया नहीं जा सकता।
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