तेल अवीव/तेहरान, 24 जून 2025 — ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। कहा जा रहा है कि इजरायली खुफिया एजेंसियों ने सैन्य कार्रवाई से पहले ही ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों को धमकी भरे फोन कॉल्स और व्यक्तिगत चेतावनियां देकर हड़कंप मचा दिया था।
🔍 ऑपरेशन ‘राइजिंग लायन’ से पहले की रणनीति
13 जून को जब इजरायल ने ऑपरेशन “राइजिंग लायन” शुरू किया, उससे पहले साइकोलॉजिकल वारफेयर यानी मनोवैज्ञानिक युद्ध शुरू हो चुका था। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली एजेंटों ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के वरिष्ठ जनरलों को फोन कर स्पष्ट चेतावनी दी:
“आपके पास 12 घंटे हैं। अपने परिवार के साथ भाग जाइए। वरना अगला निशाना आप हैं।”
📞 धमकी भरे कॉल्स और रिकॉर्डिंग्स
ऑडियो रिकॉर्डिंग के मुताबिक, इजरायल की ओर से 20 से ज्यादा कॉल्स किए गए। एक कॉल में एजेंट कहता है:
“हम आपकी गर्दन की नस से भी ज्यादा करीब हैं। याद रखिए… यह चेतावनी है, मौका नहीं।”
सूत्रों के मुताबिक, कॉल में IRGC के तीन वरिष्ठ नेता — होसैन सलामी, मोहम्मद बाघेरी और अली शमखानी — के मारे जाने का दावा भी किया गया था। हालांकि, ईरान ने बाद में पुष्टि की कि शमखानी जिंदा हैं।
🤔 ईरानी जनरल की प्रतिक्रिया
एक कॉल में कथित तौर पर ईरानी जनरल ने जवाब दिया:
“तो, मुझे अब क्या करना चाहिए?”
इजरायली एजेंट ने निर्देश दिया कि वह ईरानी शासन की आलोचना करते हुए एक वीडियो बनाए और उसे टेलीग्राम पर सार्वजनिक करे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा कोई वीडियो सामने आया या नहीं।
🧠 इजरायली रणनीति: डर का माहौल बनाना
इजरायली सूत्रों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य था:
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ईरानी शासन में भय और भ्रम पैदा करना
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जनरलों के मनोबल को तोड़ना
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और नेतृत्व के उत्तराधिकार में अस्थिरता लाना
इसके लिए कॉल, नोट्स, और यहां तक कि जनरलों की पत्नियों के जरिए भी संदेश भिजवाए गए।
निष्कर्ष
इजरायल की इस रणनीति ने यह दिखा दिया कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं है — मनोवैज्ञानिक और सूचनात्मक हमले भी निर्णायक साबित हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ईरानी नेतृत्व इस दबाव का कैसे जवाब देता है।
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