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भोपाल: जिले में जमीन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को छुपाने का आरोप लगाया जा रहा है। पिछले 15 सालों में जमीन की दरों में 200% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पंजीयन विभाग सिर्फ पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर सांसद, विधायक और बिल्डर्स नाराज हैं।
1 अप्रैल से लागू होगी नई कलेक्टर गाइडलाइन
नई कलेक्टर गाइडलाइन 1 अप्रैल से लागू की जानी है। लेकिन इस पर सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने विरोध जताया। पंजीयन विभाग ने नवंबर 2024 में 7% दर वृद्धि का प्रस्ताव दिया था, जिसे वित्तमंत्री ने रोक दिया और कहा कि जनप्रतिनिधियों से चर्चा के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
पिछले वर्षों में इस तरह हुई दर वृद्धि:
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2009 से 2013 तक – 120% वृद्धि
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2021 में – 40 लोकेशनों पर 15% तक बढ़ोतरी
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2022 में – 2800 लोकेशनों पर बढ़ोतरी, जिनमें 400 पर 10% और 2400 पर 20% वृद्धि
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2023 में – 733 लोकेशनों पर 25% तक वृद्धि
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2024 में – 1443 लोकेशनों पर 8.19% दर वृद्धि
गुजरात मॉडल की तर्ज पर सुधार की मांग
भोपाल समेत पूरे राज्य में हर साल गाइडलाइन दरें बढ़ाई जा रही हैं, जिससे रियल एस्टेट बाजार अस्थिर हो रहा है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह ‘मीक’ ने कहा कि गुजरात में 2011 से 2023 तक गाइडलाइन दरों को स्थिर रखकर निवेश और पूंजी को आकर्षित किया गया। जबकि मध्यप्रदेश में हर साल दरें बढ़ाने से बाजार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
क्रेडाई की बैठक में रखी गई मांगें:
शुक्रवार को महानिरीक्षक पंजीयक अमित तोमर के साथ बिल्डर्स की बैठक हुई। इसमें क्रेडाई ने गाइडलाइन निर्धारण में पारदर्शिता और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की मांग की।
इस बैठक में भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स, कैट, जिला बार एसोसिएशन और नर्सिंग होम एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
दर वृद्धि सही या गलत?
बिल्डर्स और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जरूरी नहीं कि हर लोकेशन पर कीमतें बढ़ाई जाएं।
3000 लोकेशनों में से सिर्फ 500 पर ही नियमित तौर पर पंजीयन और बिक्री होती है। बिना सही विश्लेषण के दर बढ़ाने से आमजन और निवेशकों को नुकसान हो सकता है।
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