कानपुर।
कानपुर और लखनऊ के बीच चलने वाली मेमू ट्रेन पहले आम लोगों के लिए जीवन रेखा मानी जाती थी। यह ट्रेन खासकर सरकारी कर्मचारी, छात्र, मजदूर, किसान, व्यापारी और अधिवक्ता जैसे दैनिक यात्रियों के लिए सस्ता और सुविधाजनक सफर देती थी।
कोरोना काल से पहले इस रूट पर 9 जोड़ी यानी 18 मेमू ट्रेनें चलती थीं, लेकिन कोविड-19 के समय इन ट्रेनों को बंद कर दिया गया और अब तक फिर से शुरू नहीं किया गया है।
यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
अब इन ट्रेनों के न होने से लोगों को मजबूरी में सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ रही है, जो कि महंगा और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है।
जिला दैनिक यात्री संघ के अध्यक्ष मुर्तजा हैदर रिजवी ने बताया कि कानपुर से चलने वाली मेमू ट्रेनें शुक्लागंज, मगरवारा, उन्नाव, सोनिक, अजगैन, कुसुंबी, जैतीपुर, हरौनी, पिपरसंड, अमौसी, मानकनगर होते हुए लखनऊ तक जाती थीं। इन ट्रेनों के बंद होने से सभी स्टेशनों पर सफर करने वालों को भारी दिक्कत हो रही है।
बनारस और अयोध्या की ट्रेनों पर भी असर
केवल मेमू ट्रेन ही नहीं, बल्कि कानपुर से फैजाबाद, अयोध्या और बनारस के लिए चलने वाली वरुणा एक्सप्रेस को भी बंद कर दिया गया था, जो अब तक शुरू नहीं हुई है।
जबकि उन्नाव रेलवे स्टेशन को अमृत भारत मॉडल स्टेशन का दर्जा भी मिल चुका है, फिर भी यात्री सुविधाएं बहाल नहीं की गई हैं।
सरकार और रेलवे से अपील
मुर्तजा रिजवी ने प्रधानमंत्री, रेल मंत्री और मंडल रेल प्रबंधक से अपील की है कि बंद पड़ी मेमू ट्रेनें और वरुणा एक्सप्रेस को जल्द से जल्द फिर से शुरू किया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
अब यात्रियों को सरकार से उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और जल्द ही ट्रेनों की वापसी होगी।
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