कुरुक्षेत्र
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम 5 दिसंबर से 11 दिसंबर तक आयोजित किए गए। इन दिनों पवेलियन मुख्य आकर्षण का केंद्र बने रहे। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अब पवेलियन खाली होने लगे हैं, और कलाकार व शिल्पकार अपने-अपने प्रदेशों और देशों को लौट रहे हैं।
खाली हुए पवेलियन:
सहयोगी प्रदेश ओडिशा, सहयोगी देश तंजानिया, उजबेकिस्तान और तजाकिस्तान के पवेलियन अब खाली हो चुके हैं। हरियाणा पवेलियन, जो महोत्सव का मुख्य आकर्षण था, उसे भी हटा दिया गया है। यहां के फर्नीचर और शिल्पकारों की कला भी अब नजर नहीं आ रही।
पर्यटकों की मायूसी:
हर दिन की तरह आज भी बड़ी संख्या में पर्यटक इन पवेलियनों को देखने पहुंचे, लेकिन खाली पवेलियन देखकर उन्हें मायूसी हुई और वे निराश होकर लौट गए।
मुख्य आकर्षण:
गीता महोत्सव में 5 से 11 दिसंबर तक विभिन्न पवेलियनों को बड़े आकर्षक तरीके से सजाया गया था। बड़ी संख्या में शिल्पकार अपनी कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए पहुंचे थे। लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इन पवेलियनों में खूब सराहे गए।
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