तेहरान / जिनेवा / वॉशिंगटन:
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित परमाणु वार्ता को लेकर गहरा अविश्वास जताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह वार्ता सिर्फ एक कवच (cover-up) है, ताकि इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों को जायज ठहराया जा सके।
“हम भरोसा कैसे करें?” — अरागची का तीखा सवाल
एनबीसी को दिए इंटरव्यू में अरागची ने कहा:
“अमेरिका ने हमारे साथ कूटनीति को धोखा दिया है। इज़राइल ने वार्ता से पहले हम पर हमला किया, और अमेरिका ने इस पर चुप्पी साध ली। अब हमें नहीं पता कि उन पर कैसे भरोसा करें।”
उन्होंने दो टूक कहा कि यदि अमेरिका वास्तविक समाधान चाहता है, तो उसे पहले अपनी मंशा साबित करनी होगी।
“हम बातचीत करेंगे, लेकिन शर्तों पर नहीं”
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अरागची ने यह साफ कर दिया कि ईरान किसी भी “शून्य संवर्धन” (Zero Enrichment) की मांग को स्वीकार नहीं करेगा।
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“यूरेनियम संवर्धन हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत और राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक है। यह कोई सौदेबाज़ी का विषय नहीं है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ का जिक्र करते हुए कहा:
“वे हर बैठक में अपने शब्द बदलते रहे। या तो वे खुद तय नहीं कर पा रहे, या फिर अपने वादे निभा नहीं पा रहे।”
“बम से ज्ञान नहीं मिटता”
ईरानी मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला करता है, तो “हम दोबारा बना लेंगे”।
“ज्ञान को न बम से मिटाया जा सकता है, न धमकियों से। यह तकनीक अब देश की संपत्ति है।”
संयुक्त हमला हुआ तो “हम जवाब देंगे”
अरागची ने कहा कि अगर अमेरिका, इज़राइल के साथ मिलकर हमला करता है, तो ईरान भी अपने आत्मरक्षा के अधिकार के तहत जवाब देगा।
“युद्ध में दोनों पक्ष हमला करते हैं। यह कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन हमें अपने नेता पर हमले की धमकियों को गंभीरता से लेना होगा।”
“धमकी नहीं, अपमान है” — खामेनेई पर ट्रंप की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया
जब उनसे पूछा गया कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई को निशाना बनाने की बात को वह कैसे देखते हैं, तो अरागची ने कहा:
“यह कोई धमकी नहीं, बल्कि एक अपमान है। हम हमेशा अमेरिकी राष्ट्रपति के बारे में सम्मान से बात करते हैं, और वही उम्मीद करते हैं।”
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा था कि अमेरिका को खामेनेई की लोकेशन पता है, लेकिन “अभी के लिए” उन्हें निशाना बनाने की कोई योजना नहीं है।
पृष्ठभूमि: परमाणु वार्ता से पहले आया हमला
यह बयान ऐसे समय में आया है जब:
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इज़राइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया।
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इस हमले से ठीक पहले ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता की संभावनाएं बन रही थीं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह दो सप्ताह में तय करेंगे कि अमेरिका इस संघर्ष में शामिल होगा या नहीं।
ईरान की मांग: पहले हिंसा रुके, तभी वार्ता संभव
जिनेवा में यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के बाद अरागची ने कहा:
“हम तब तक बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं जब तक इज़राइल के हमले नहीं रुकते। हम किसी भी हाल में वार्ता को ‘डिक्टेशन’ (आदेश) नहीं बनने देंगे।”
निष्कर्ष: मध्य पूर्व में शांति पर संकट
ईरान और इज़राइल के बीच हवाई हमलों का सिलसिला लगातार नौवें दिन भी जारी है। यूरोपीय देश तनाव कम करने के लिए वार्ता की अपील कर रहे हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
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