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कैथोलिक चर्च को मिला नया पोप: अमेरिका के रॉबर्ट प्रीवोस्ट बने ‘लियो 14’, 2000 साल में पहली बार अमेरिका से पोप चयन

वेटिकन सिटी: कैथोलिक चर्च के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिका के रॉबर्ट प्रीवोस्ट को चर्च का नया पोप चुना गया है। उन्होंने पोप बनने के बाद ‘लियो 14’ नाम अपनाया, और इस तरह वे इस नाम को धारण करने वाले पहले अमेरिकी और 2000 साल पुराने चर्च इतिहास में अमेरिका से चुने जाने वाले पहले पोप बन गए।


सफेद धुएं से हुई शुरुआत, शांति का संदेश लेकर आए लियो 14

गुरुवार को जब सिस्टिन चैपल की चिमनी से सफेद धुआं उठा, तो यह संकेत था कि नया पोप चुन लिया गया है। इसके बाद सेंट पीटर्स बेसिलिका की बालकनी से पोप लियो 14 ने दुनिया को संबोधित किया और अपने पहले संबोधन में कहा, “शांति आपके साथ हो।” उन्होंने चर्च की प्राथमिकताओं में शांति, संवाद और धर्म प्रचार को प्रमुखता देने की बात कही।


पेरू में बिताया अधिकांश जीवन, ऑगस्टीनियन आदेश से जुड़े रहे

69 वर्षीय रॉबर्ट प्रीवोस्ट ने चर्च सेवा का बड़ा हिस्सा पेरू में बिताया है, जहाँ वे लंबे समय तक सामाजिक और धार्मिक सेवा में संलग्न रहे। वे ऑगस्टीनियन धार्मिक आदेश के सदस्य हैं और चर्च में वर्षों से समर्पित सेवा करते रहे हैं। पोप बनने के बाद उन्होंने पारंपरिक लाल टोपी धारण कर अपने कर्तव्यों की शुरुआत की।


ट्रंप ने कहा- “यह हमारे देश के लिए गर्व का क्षण”

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अवसर पर प्रतिक्रिया दी और कहा, “इससे बड़ा सम्मान अमेरिका के लिए और क्या हो सकता है। हम गर्वित और आश्चर्यचकित हैं कि एक अमेरिकी अब कैथोलिक चर्च का सर्वोच्च पद संभाल रहे हैं।”

गौरतलब है कि ‘लियो’ नाम रखने वाले अंतिम पोप लियो 13 थे, जिनका कार्यकाल 1878 से 1903 तक रहा और वे इटली से थे।


पोप फ्रांसिस का हुआ था निधन

21 अप्रैल को पोप फ्रांसिस का निधन हो गया था। वेटिकन के कार्डिनल केविन फारेल, जो कैमरलेंगो की भूमिका में थे, ने यह जानकारी दी थी कि “पोप फ्रांसिस आज सुबह 7:35 बजे प्रभु यीशु के पास लौट गए।” पोप फ्रांसिस ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा चर्च और ईसाई समाज की सेवा में समर्पित किया था।


नया युग, नई उम्मीदें

रॉबर्ट प्रीवोस्ट के पोप बनने के साथ ही कैथोलिक चर्च एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। अमेरिका जैसे देश से पोप का चुना जाना यह दर्शाता है कि चर्च वैश्विक दृष्टिकोण से नेतृत्व को देख रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि लियो 14 किस तरह से विश्वभर के ईसाई समुदाय को एकजुट और सशक्त बनाएंगे।

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