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क्या इजराइल के खिलाफ जंग में ईरान का साथ देगा पाकिस्तान? रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दिए संकेत

इस्लामाबाद/तेहरान – ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान ने एक नया भू-राजनीतिक संकेत दे दिया है।
आसिफ ने पत्रकारों से बातचीत में इशारा किया कि पाकिस्तान, ईरान के साथ खड़ा हो सकता है, और इजराइल को एक “साझा दुश्मन” बताया।


“अगर अभी नहीं जागे, तो आगे और मुसलमान मरेंगे” – आसिफ

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि

“गाजा में हो रहे नरसंहार और ईरान पर हुए हमले ने यह साबित कर दिया है कि मुस्लिम देशों को अब एकजुट होना ही होगा।”
उन्होंने चेताया कि अगर अभी मुस्लिम देश एक साथ नहीं आए, तो भविष्य में उन्हें और बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।


इजराइल को बताया साझा शत्रु

आसिफ ने कहा कि अब समय आ गया है कि

“हम एक आम दुश्मन – इजराइल – के खिलाफ एकजुट हो जाएं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पर हुआ हमला केवल एक देश पर हमला नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम वर्ल्ड की अस्मिता पर चोट है।


ईरान दौरे में शहबाज शरीफ पर खामेनेई की नाराज़गी

कुछ सप्ताह पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान का दौरा किया था, जहां उनकी मुलाकात ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से हुई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने इजराइल के खिलाफ पाकिस्तान की चुप्पी पर नाराज़गी जताई और कहा कि

“अगर पाकिस्तान के पास परमाणु ताकत है और फिर भी वह जुल्म के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाता, तो यह अफसोसजनक है।”

हालांकि, शहबाज शरीफ ने इस टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।


ईरान-इजराइल संघर्ष और संभावित युद्ध

13 जून को इजराइल द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला करने के बाद हालात और बिगड़ गए।
इसके जवाब में ईरान ने तेल अवीव पर करीब 200 मिसाइलें दागीं, जिससे तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।

इस घटनाक्रम के बाद अब मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध की आशंका व्यक्त की जा रही है।


सऊदी अरब बना शांति वार्ता की धुरी?

इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से संपर्क किया है।
सलमान का ईरान और इजराइल दोनों से संवाद है, और माना जा रहा है कि बीजिंग के बाद अब रियाद मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।


निष्कर्ष: क्या पाकिस्तान बदलेगा अपनी नीति?

पाकिस्तान ने अब तक इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं बनाए हैं। लेकिन ख्वाजा आसिफ का बयान एक संकेत है कि देश की विदेश नीति में कुछ बदलाव आ सकते हैं, खासकर तब जब मुस्लिम विश्व में एकजुटता की मांग ज़ोर पकड़ रही है।

क्या यह केवल शब्दों की जंग है या पाकिस्तान अब सचमुच ईरान के साथ खड़ा होगा – यह आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा।

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