मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर है। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत से पहले इज़राइल और ईरान के बीच हालात बेहद नाजुक हो चुके हैं। ओमान में इस रविवार होने वाली वार्ता से पहले जो घटनाएं सामने आ रही हैं, वे संकेत देती हैं कि अगर वार्ता विफल रही, तो एक और युद्ध शुरू हो सकता है। सवाल यह है—क्या इज़राइल ईरान पर हमले की तैयारी कर चुका है?
नीचे हम उन छह संकेतों पर नज़र डालते हैं जो इज़राइल के संभावित हमले की ओर इशारा करते हैं:
1. अमेरिका का अलर्ट मोड में आना
अमेरिका ने इराक और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में मौजूद अपने राजनयिक स्टाफ और सैन्य परिवारों को तत्काल क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए हैं। विदेश विभाग और पेंटागन दोनों ने यह कदम सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए उठाया है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका को आने वाले दिनों में किसी बड़े संघर्ष की आशंका है।
2. ट्रंप का घटता भरोसा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले ईरान से वार्ता को सकारात्मक मानते थे, अब कह रहे हैं कि तेहरान जानबूझकर बातचीत में देरी कर रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि अगर कोई समझौता नहीं होता, तो सैन्य कार्रवाई एक विकल्प है।
3. खुफिया एजेंसियों की चेतावनी
अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़राइल अकेले ही ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो ईरान इज़राइल के साथ-साथ अमेरिका को भी जवाबदेह मान सकता है। तेहरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि इज़राइल की कार्रवाई में अमेरिका को भी शामिल माना जाएगा।
4. ईरान की रहस्यमयी पोस्ट – “We Are Ready”
ईरान सरकार ने सोशल मीडिया पर सिर्फ तीन शब्दों की एक पोस्ट की—“We Are Ready”। ऐसे समय में यह बयान आना जब इज़राइल की ओर से हमले की अटकलें चल रही हैं, युद्ध के लिए तैयार रहने का स्पष्ट संकेत है।
5. इज़राइली सेना की सक्रियता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइल ने अपनी वायुसेना को हाई अलर्ट पर रखा है। लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल प्रणाली तैनात की जा चुकी है। इसके अलावा, कुछ सहयोगी देशों को संकेत भी दिए गए हैं कि अगर ईरान कोई “रेड लाइन” पार करता है, तो जवाबी हमला निश्चित है।
6. अमेरिका की खामोशी या मौन सहमति?
हालांकि अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से इज़राइल को हमले की अनुमति नहीं दी है, लेकिन उसकी चुप्पी और अपने नागरिकों को हटाने की पहल, यह दर्शाती है कि वह किसी भी युद्ध की संभावना को गंभीरता से ले रहा है।
क्या युद्ध टाला जा सकता है?
ईरान ने कहा है कि वह कूटनीति को प्राथमिकता देता है और संघर्ष नहीं चाहता। लेकिन अगर रविवार की वार्ता विफल होती है, तो मिसाइलें चल सकती हैं। मिडिल ईस्ट एक बार फिर संघर्ष की चपेट में आ सकता है।
निष्कर्ष:
अब दुनिया की निगाहें ओमान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हैं। यह बातचीत शांति का रास्ता खोल सकती है या फिर मध्य पूर्व को एक और युद्ध में झोंक सकती है। संकेत बता रहे हैं—हवा में बारूद की गंध महसूस होने लगी है।
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