अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता की पृष्ठभूमि में, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ का एक बयान अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में आ गया है। विटकॉफ ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यहूदी समुदाय का “सच्चा मित्र” बताते हुए यहां तक कह दिया कि ट्रंप एक दिन इज़राइल के प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं।
न्यूयॉर्क में हुआ बयान, ट्रंप की फिर से तारीफ
यूनाइटेड हत्ज़ालाह के एक कार्यक्रम में बोलते हुए विटकॉफ ने कहा:
“राष्ट्रपति ट्रंप यहूदी लोगों के बहुत अच्छे दोस्त हैं। उनका इज़राइल के प्रति जो समर्पण है, वो अद्वितीय है। मेरा किसी का अपमान करने का इरादा नहीं, लेकिन अगर कोई अमेरिकी राष्ट्रपति एक साथ इज़राइल का प्रधानमंत्री भी बन सकता है, तो वो डोनाल्ड ट्रंप होंगे।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब इज़राइल, अमेरिका को ईरान के साथ किसी भी परमाणु समझौते से दूर रहने की सलाह दे रहा है।
ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों में आई थी दूरी
हाल ही में राजनीतिक विश्लेषकों ने संकेत दिए थे कि ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के रिश्तों में थोड़ी तल्खी आई है। कुछ मौकों पर ट्रंप नेतन्याहू से अलग खड़े नज़र आए, जिससे अटकलें तेज़ हो गई थीं कि दोनों नेताओं में मतभेद हैं। विटकॉफ का यह बयान ट्रंप के इज़राइल के प्रति समर्थन को दोबारा स्पष्ट करता है।
ईरान पर कड़ा रुख
समारोह के दौरान विटकॉफ ने ईरान को लेकर अमेरिका की कड़ी नीति का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा:
“ईरान को कभी भी यूरेनियम समृद्ध करने या किसी भी तरह की परमाणु क्षमताओं के विकास की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”
उन्होंने ईरान को एक कठोर और जिद्दी देश बताया जो वार्ता में अपनी शर्तों को बदलने को तैयार नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी आया था सामने
कुछ ही दिनों पहले डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि:
“ईरान हमारी शर्तों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। वे अपनी परमाणु योजना को जारी रखना चाहते हैं, जो अस्वीकार्य है।”
निष्कर्ष:
अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता के बीच ट्रंप और इज़राइल को लेकर दिए गए विटकॉफ के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर अमेरिका कूटनीति के जरिए समाधान की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इज़राइल और उसके समर्थक यह स्पष्ट कर रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियारों की दिशा में एक भी कदम नहीं उठाने दिया जाएगा।
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