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क्या पाकिस्तान में एक और तख्तापलट की आहट है? फील्ड मार्शल बने आसिम मुनीर और फंसते नज़र आ रहे शहबाज़ शरीफ

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सैन्य दबदबे की आशंका गहराती दिख रही है। देश के सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर को हाल ही में फील्ड मार्शल की रैंक दी गई है — एक ऐसा दर्जा जो पाकिस्तानी इतिहास में अब तक केवल एक बार, 1959 में अयूब खान को मिला था। लेकिन इस नई नियुक्ति ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

क्या फील्ड मार्शल बनने का मतलब है कानून से ऊपर होना?

फील्ड मार्शल का पद पाकिस्तानी संविधान में एक आजीवन सम्मानित सैन्य पद है, जिसे हटाया नहीं जा सकता। इस रैंक पर व्यक्ति न्यायिक कार्रवाई से भी लगभग अप्रभावित रहता है। यानी अब आसिम मुनीर किसी भी अदालत या राजनीतिक कार्रवाई से सुरक्षित हो गए हैं।

जनरल मुनीर ने खुद के लिए तय करवाई फाइव-स्टार रैंक?

पूर्व में फोर-स्टार जनरल रहे मुनीर को अब फाइव-स्टार वर्दी मिली है, और इस पदोन्नति को खुद प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की ओर से अनुमोदित करवा लिया गया। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय वास्तव में जनरल की खुद की योजना थी, जिसे राजनीतिक मोहरे की मदद से अमल में लाया गया।

क्या सेना प्रमुख का पद भी छोड़ेंगे?

सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या फील्ड मार्शल बनने के बाद आसिम मुनीर सेना प्रमुख का पद छोड़ देंगे? संभावना नहीं के बराबर है। पाकिस्तान के पत्रकारों और जानकारों का मानना है कि मुनीर इस रैंक के साथ-साथ आर्मी चीफ का कार्यभार भी बनाए रखेंगे — क्योंकि असली ताकत सैन्य कमांड में होती है, न कि केवल प्रतीकात्मक पद में।

एक्सटेंशन भी तय, 2027 तक बनी रहेगी पकड़?

मुनीर का कार्यकाल इस साल नवंबर में समाप्त होना था, लेकिन हाल ही में पारित कानून के चलते सेना प्रमुख का कार्यकाल तीन से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है। यानी अब ऐसा लग रहा है कि वह 2027 तक सेना प्रमुख के तौर पर रहेंगे।

इमरान खान की पार्टी का विरोध

इस फैसले से विपक्ष भी खासा नाराज़ है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के नेता इस पदोन्नति को तानाशाही की ओर बढ़ता कदम बता रहे हैं। इमरान की बहन अलीमा खान ने तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि अगर यही करना था, तो शहबाज़ शरीफ को आसिम मुनीर को पाकिस्तान का “बादशाह” ही घोषित कर देना चाहिए था।


निष्कर्ष

पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों में एक बार फिर सेना की छाया गहराती जा रही है। फील्ड मार्शल की रैंक के जरिए जनरल मुनीर ने न केवल खुद को कानूनी सुरक्षा प्रदान की है, बल्कि राजनीतिक स्थिरता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि क्या पाकिस्तान में एक और ‘इनडायरेक्ट कूप’ की पटकथा लिखी जा रही है?

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