तेल अवीव/तेहरान: इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। लगातार हो रहे हमलों में दोनों देशों को जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्ध विराम और बातचीत की अपील कर रहा है। मगर, इजरायल सरकार के हालिया बयानों से स्पष्ट हो गया है कि शांति फिलहाल दूर की बात है।
इजरायल का स्पष्ट रुख: युद्ध रुकेगा नहीं
इजरायल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने इस संघर्ष के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता की कोई संभावना नहीं है। उनका कहना है कि जब तक इजरायल अपने सैन्य और रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा नहीं कर लेता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
रक्षा मंत्री का चेतावनी भरा बयान
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा, “तेहरान पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सरकारी ढांचों पर हमले हो रहे हैं, लोग भाग रहे हैं। यह किसी भी तानाशाही के अंत की शुरुआत जैसा है।”
उनके इस बयान को ईरानी शासन पर दबाव और वहां सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करने वाला माना जा रहा है।
विदेश मंत्री की दो-टूक
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी स्थिति को लेकर सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा, “ईरान जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है और निर्दोष लोगों की हत्या कर रहा है। इजरायल ऐसे किसी राष्ट्र के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा जो आतंकवाद को बढ़ावा देता हो।”
उन्होंने कहा कि जब तक इजरायल अपने “सभी रणनीतिक लक्ष्य” हासिल नहीं कर लेता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
अब तक का नुकसान: दोनों पक्षों को भारी क्षति
इजरायली सेना ने दावा किया है कि हाल के दिनों में उन्होंने ईरान के भीतर 1,100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है।
इन हमलों में लगभग 585 ईरानी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की मौत हुई है, जिनमें 239 आम नागरिक भी शामिल हैं।
इसके अलावा 1,300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इनमें कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक भी शामिल हैं।
दूसरी ओर, ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमलों में इजरायल में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
क्या अमेरिका होगा शामिल?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि वह इस संघर्ष में सीधा दखल नहीं देंगे, लेकिन हाल के बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका भी अब इजरायल के समर्थन में और सक्रिय हो सकता है। अमेरिका ने क्षेत्र में युद्धपोत और अतिरिक्त सैन्य संसाधन तैनात कर दिए हैं, जिससे तनाव और भी बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, और कई एशियाई देशों ने इस युद्ध को तत्काल रोकने की अपील की है, लेकिन ज़मीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। इजरायल और ईरान दोनों ही पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे मध्य-पूर्व में एक बड़े और दीर्घकालिक संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।
निष्कर्ष:
इस समय तक के घटनाक्रमों को देखकर कहा जा सकता है कि इजरायल और ईरान के बीच सीधी बातचीत की संभावना फिलहाल नहीं है। इजरायली मंत्रियों के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल निर्णायक जीत की स्थिति तक ही अपने ऑपरेशन को रोकने पर विचार करेंगे।
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