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क्या शिमला समझौते पर रोक से LOC पर खतरा मंडराएगा? भारत पहले भी दे चुका है करारा जवाब

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। भारत ने जवाबी कदम के तौर पर सिंधु जल संधि को निलंबित करने के साथ-साथ पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं। इसी बीच, पाकिस्तान ने भी प्रतिक्रिया स्वरूप शिमला समझौते को निलंबित करने की घोषणा की है। इस कदम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब नियंत्रण रेखा (LOC) पर भी संकट गहरा सकता है?

मुख्य बातें:

  • पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तल्खी

  • भारत ने सिंधु जल संधि पर कार्रवाई और वीजा रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए

  • जवाब में पाकिस्तान ने शिमला समझौते को स्थगित किया और भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद किया

क्या है शिमला समझौता?

1972 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच भविष्य के शांतिपूर्ण संबंधों की नींव रखना था। इसमें तय किया गया कि भारत और पाकिस्तान अपने सभी मुद्दों को आपसी बातचीत से सुलझाएंगे, किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के बिना। कश्मीर मुद्दा भी इसी समझौते के तहत बातचीत का हिस्सा रहा।

LOC को कैसे मिली थी मान्यता?

शिमला समझौते के तहत 1971 के युद्ध के बाद जो युद्धविराम रेखा बनी थी, उसे नियंत्रण रेखा (LOC) के रूप में स्वीकार किया गया। दोनों पक्षों ने वचन दिया था कि वे इस रेखा का सम्मान करेंगे और बल प्रयोग कर या धमकी देकर इसे बदलने की कोशिश नहीं करेंगे।

पाकिस्तान का लगातार उल्लंघन

हालांकि इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान ने कई बार शिमला समझौते का उल्लंघन किया है। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने LOC पार कर घुसपैठ की और भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग-1 के पास तक पहुंच गया। भारत ने जवाब में जबरदस्त सैन्य अभियान चलाकर कब्जा छुड़वाया। इससे पहले भी पाकिस्तान ने 1984 में सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा करने की कोशिश की थी, लेकिन भारत ने ऑपरेशन मेघदूत के जरिए इसे विफल कर दिया था।

क्या LOC पर असर पड़ेगा?

पाकिस्तान द्वारा शिमला समझौते को निलंबित करने का राजनीतिक असर जरूर हो सकता है, लेकिन LOC की स्थिति पर इसका तुरंत कोई बड़ा प्रभाव पड़ना मुश्किल है। LOC को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और दोनों देशों द्वारा, भले ही तनाव के बीच सही, मान्यता मिली हुई है। भारत ने हर बार पाकिस्तान की आक्रामक कोशिशों का मुंहतोड़ जवाब दिया है, चाहे वह कारगिल हो या सियाचिन।

निष्कर्ष:

शिमला समझौते को रोकने का फैसला दोनों देशों के संबंधों में और तल्खी ला सकता है, लेकिन LOC की स्थिरता को चुनौती देने की किसी भी कोशिश का भारत मजबूती से जवाब देने के लिए तैयार है। इतिहास इस बात का गवाह है कि भारत ने हर बार पाकिस्तान को उसके दुस्साहस का करारा सबक सिखाया है।

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