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क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा भाव

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास भी फिलहाल असरदार साबित नहीं हो रहे हैं।

आईईए का बड़ा फैसला भी बेअसर

तेल की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने का फैसला लिया था। यह आईईए के इतिहास में सबसे बड़ी तेल रिलीज मानी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद कीमतों में गिरावट नहीं आई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का भाव

गुरुवार सुबह करीब 8:25 बजे इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का भाव 100.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो लगभग 8.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वहीं एनवाईमेक्स पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का भाव 94.68 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो करीब 8.85 प्रतिशत बढ़ा है।

इराक में हमले से बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के अनुसार इराक की समुद्री सीमा में हुए एक हमले में दो तेल टैंकरों में आग लग गई। शुरुआती जांच में इसे ईरान से जुड़ा हमला बताया गया है। इस घटना के बाद इराक ने अपने सभी तेल टर्मिनलों का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

200 डॉलर तक पहुंच सकती है कीमत

ईरान की सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फकारी ने दावा किया है कि हालात ऐसे ही रहे तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं। उनका कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा में अस्थिरता के कारण तेल बाजार पर दबाव बना हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का असर

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया के लगभग एक चौथाई तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। अगर इस मार्ग में बाधा आती है तो वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भारत पर पड़ सकता है असर

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

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