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आम लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम कर दिया है। कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर पहले 20% आयात शुल्क लगता था। अब इसे घटाकर 10% कर दिया गया है।
इस फैसले से इन तेलों पर कुल टैक्स 27.5% से घटकर 16.5% रह जाएगा। नई दरें 31 मई से पूरे देश में लागू होंगी। माना जा रहा है कि इसके बाद बाजार में खाने के तेल की कीमतों में कमी देखने को मिलेगी।
MRP पर पड़ेगा सीधा असर
सरकार ने तेल कंपनियों से कहा है कि आयात शुल्क में मिली राहत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाया जाए। कंपनियां अब अपनी बोतलों और पैकेट पर छपी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में बदलाव कर रही हैं। जल्द ही नए दामों के साथ उत्पाद बाजार में आ सकते हैं।
कितनी कम हो सकती हैं कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ हफ्तों में खुदरा बाजार में खाने के तेल की कीमतें 5 से 10 रुपये प्रति लीटर तक कम हो सकती हैं। हालांकि, असली कमी ब्रांड और इलाके के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
महंगाई कम करने की कोशिश
पिछले कुछ महीनों में खाने के तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं, जिससे घर का बजट बिगड़ रहा था। सरकार ने यह कदम महंगाई को नियंत्रित करने और जरूरी चीजों को सस्ता रखने के लिए उठाया है।
हालांकि, कुछ कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क घटने से देश के तिलहन किसानों को नुकसान हो सकता है। सस्ता विदेशी तेल आने से स्थानीय किसानों को बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
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