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रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी, खाने-पीने से लेकर पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स तक बढ़ सकते हैं दाम
channel_009 | Business & Consumer Desk
आम लोगों की जेब पर एक बार फिर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। खाने-पीने की चीजों से लेकर पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स तक कई रोजमर्रा के सामान महंगे होने की आशंका है। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका असर अब प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दिख सकता है।
सबसे ज्यादा दबाव पैकेजिंग मटीरियल पर देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पैकेजिंग से जुड़े सामानों की कीमतों में 56% तक बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर FMCG कंपनियों पर पड़ रहा है, क्योंकि बिस्किट, स्नैक्स, तेल, साबुन, शैम्पू, क्रीम, टूथपेस्ट और अन्य रोजमर्रा के सामानों में पैकेजिंग लागत बड़ी भूमिका निभाती है।
कंपनियों के सामने अब दो रास्ते हैं—या तो दाम बढ़ाएं, या फिर पैकेट का साइज छोटा करें। यानी ग्राहक को वही कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन सामान की मात्रा कम मिल सकती है। इसे मार्केट की भाषा में “श्रीनकफ्लेशन” कहा जाता है।
महंगाई का असर खासकर मिडिल क्लास और लोअर इनकम परिवारों पर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि ये प्रोडक्ट्स रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े होते हैं। पहले से ही खाद्य तेल, दाल, मसाले और घरेलू खर्चों में बढ़ोतरी से लोग परेशान हैं। ऐसे में FMCG प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ना घरेलू बजट को और बिगाड़ सकता है।
बड़ी बातें
खाने-पीने की चीजें और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं
कंपनियों पर कच्चे माल की बढ़ती लागत का दबाव
पैकेजिंग मटीरियल 56% तक महंगा हुआ
साबुन, शैम्पू, बिस्किट, स्नैक्स और तेल पर असर संभव
दाम बढ़ाने या पैकेट का साइज घटाने की तैयारी हो सकती है
क्यों बढ़ सकते हैं दाम?
कंपनियों के लिए कच्चा माल, ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और उत्पादन लागत लगातार महंगी हो रही है। जब लागत बढ़ती है, तो कंपनियां इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालती हैं। यही वजह है कि आने वाले दिनों में रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
ग्राहकों पर क्या असर होगा?
ग्राहकों को या तो सामान महंगा मिलेगा, या फिर उसी कीमत में कम मात्रा मिलेगी। इसका असर घरेलू बजट पर सीधा पड़ेगा। खासकर छोटे पैक खरीदने वाले ग्राहक और ग्रामीण बाजार इससे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
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