Related Articles
नागौर जिले की खींवसर विधानसभा सीट, जहां पिछले 16 सालों से लगातार जीत दर्ज कर रहे आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल इस बार भाजपा के चक्रव्यूह में फंस गए। भाजपा ने 13,901 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर आरएलपी के गढ़ खींवसर को फतेह कर लिया। इस हार के बाद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि वे जनता के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
हार के कारण:
हनुमान बेनीवाल का कहना है कि आरएलपी को हराने के लिए सभी विरोधी दल एकजुट हो गए।
- भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर उनके खिलाफ चुनाव लड़ा।
- भाजपा ने धन-बल और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया।
- जातीय राजनीति का सहारा लिया गया।
- हालांकि, बेनीवाल ने कहा, “हम हारकर भी जीते हैं, क्योंकि हमारा वोट बैंक बढ़ा है। आरएलपी को इस बार पहले से ज्यादा वोट मिले।”
कांग्रेस की भूमिका पर आरोप:
बेनीवाल ने कहा कि कांग्रेस ने खींवसर में अपने वोट भाजपा को ट्रांसफर कर दिए।
- कांग्रेस नेता भाजपा के लिए वोट मांग रहे थे।
- इस बार खींवसर में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को नहीं मिला।
अपनी हार पर प्रतिक्रिया:
बेनीवाल ने अपनी हार को लोकतंत्र का हिस्सा मानते हुए कहा,
“जनता का जनादेश सर्वोपरि है। हार-जीत चुनाव का हिस्सा हैं। वर्ष 2008 से खींवसर की जनता का आशीर्वाद मुझ पर और आरएलपी पर बना रहा है। मैं जनता के लिए हमेशा संघर्ष करता रहूंगा।”
हनुमान बेनीवाल ने यह भी भरोसा दिलाया कि वे इस हार से निराश नहीं हैं और जनता के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।
CHANNEL009 Connects India
