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जगदलपुर के गंगामुंडा तालाब के किनारे एक भव्य आध्यात्मिक धाम का निर्माण तेजी से हो रहा है। यहां श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्भुज शिवालय बनाया जा रहा है। मंदिर पूरा होने के बाद यह बस्तर क्षेत्र का सबसे बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह मंदिर द्रविड़ शैली में बनाया जा रहा है, जिसमें दक्षिण भारतीय वास्तुकला की झलक साफ दिखाई देती है। मंदिर का निर्माण स्वर्गीय मरिपि सत्यनारायण नायडू के परिवार द्वारा दान की गई भूमि पर हो रहा है। इसकी देखरेख श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्भुज शिवालय ट्रस्ट कर रहा है।
ट्रस्ट का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 की महाशिवरात्रि पर मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की जाए। लगभग 30 हजार वर्गफुट में फैले इस परिसर में पूजा-पाठ के साथ ध्यान, योग और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों की भी व्यवस्था होगी।
मंदिर की प्रमुख विशेषताएं
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मंदिर का डिजाइन तिरुपति के प्रसिद्ध वास्तु विशेषज्ञ बाल भास्कर ने तैयार किया है।
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पहले तल के गर्भगृह में चतुरमुखी शिवलिंग स्थापित होगा, जो मंदिर की खास पहचान होगी।
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भूतल पर नवग्रह मंदिर, बजरंगबली मंदिर, यज्ञशाला और ध्यान केंद्र बनाए जा रहे हैं।
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पहले तल पर दुर्गा, सरस्वती, अन्नपूर्णा, गणेश, कार्तिकेय, रामदरबार और सूर्य देव के सात मंदिर होंगे।
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मुख्य द्वार पर हनुमान जी और प्रवेश द्वार पर मां दंतेश्वरी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
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सभी मूर्तियां महाबलीपुरम से मंगाई जा चुकी हैं।
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आंध्र प्रदेश के काकीनाडा से आए करीब 40 शिल्पकार मंदिर की नक्काशी का काम कर रहे हैं।
ट्रस्ट का कहना है कि यह शिवालय केवल पूजा का स्थान नहीं होगा, बल्कि सनातन परंपरा और सांस्कृतिक एकता का केंद्र बनेगा, जहां श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर सकेंगे।
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