गाज़ा स्ट्रिप के दक्षिणी इलाके में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सहायता केंद्र की ओर बढ़ रही फिलिस्तीनी भीड़ पर इजरायली टैंकों और हथियारों से फायरिंग की गई। घटना मंगलवार को हुई जब हजारों की संख्या में नागरिक मदद लेने के लिए एक वितरण स्थल की ओर बढ़ रहे थे।
सहायता के बदले गोलियां!
एक अमेरिकी समर्थित एनजीओ द्वारा स्थापित सहायता केंद्र तक पहुँचने की कोशिश कर रही भीड़ पर अचानक गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। राफा के बाहरी क्षेत्र में स्थित इस केंद्र को इजरायल ने स्वयं मान्यता दी थी और यह मदद वितरण का दूसरा दिन था। इसके बावजूद, सैन्य सीमा पार कर रहे लोगों पर हमला कर दिया गया।
चश्मदीदों की आपबीती
एपी (Associated Press) के एक पत्रकार, जो मौके पर मौजूद थे, ने बताया कि भीड़ के बीच टैंकों की आवाजें और गोलियों की गूंज साफ सुनी गई। कुछ दूरी पर गोली चलने के बाद धुएं के बादल भी उठते देखे गए। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले में कितने लोग घायल या हताहत हुए हैं।
इजरायली सेना ने साधी चुप्पी
अब तक इजरायली रक्षा बलों (IDF) की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि फायरिंग किस स्थिति में की गई – क्या इसे चेतावनी के रूप में किया गया या भीड़ को तितर-बितर करने के लिए।
सवालों के घेरे में मानवीय मदद
ग़ौरतलब है कि गाज़ा में चल रहे संघर्ष के बीच खाद्य और चिकित्सा सहायता पहुँचाना लगातार चुनौती बना हुआ है। इजरायल द्वारा खुद चुने गए वितरण स्थल पर फायरिंग की यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार और मानवीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा सकती है।
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