पेरिस/मार्सेई:
गाजा में जारी संघर्ष के बीच फ्रांस से एक चौंकाने वाली और मानवाधिकारों से जुड़ी पहल सामने आई है। फ्रांस के डॉक वर्कर्स ने इजराइल को हथियारों की सप्लाई से साफ इनकार कर दिया है। दक्षिणी फ्रांस के फोस-सुर-मेर बंदरगाह पर मजदूरों ने मशीनगन के पुर्जों से भरे कंटेनरों को लोड करने से मना कर दिया। उनका कहना है कि वे किसी भी तरह से “नरसंहार” में भाग नहीं बन सकते।
⚠️ क्या है मामला?
फ्रांसीसी ट्रेड यूनियन CGT के अनुसार, बंदरगाह पर 19 पैलेट ऐसे थे जिनमें मशीनगन लिंक रखे गए थे। ये लिंक स्वचालित हथियारों में गोलियों को तेज़ी से फायर करने के लिए जरूरी होते हैं। यूनियन ने इन्हें पहचानने के बाद लोडिंग से इनकार कर दिया।
डॉक वर्कर्स के प्रतिनिधि क्रिस्टोफ क्लेरे ने मीडिया को बताया कि उन्हें गुरुवार को इन हथियारों की खेप की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने इसे अलग रख दिया और न छूने की चेतावनी जारी की। नियमों के मुताबिक जब डॉक वर्कर्स कोई खेप नहीं छूते, तो कोई और कर्मचारी भी उसे नहीं छू सकता।
🎙️ यूनियन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
CGT की महासचिव सोफी बिनेट ने इस फैसले को मानवीय मूल्यों की रक्षा बताया और फ्रांस सरकार से इजराइल को सभी प्रकार की सैन्य आपूर्ति रोकने की मांग की।
लेफ्ट विंग दलों जैसे सोशलिस्ट पार्टी ने भी इस कदम का समर्थन किया। नेता ओलिवियर फॉर ने कहा, “मानवता कोई व्यापारिक वस्तु नहीं है।”
🇫🇷 सरकार का पक्ष और सवाल
फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टियन लेकॉर्नु ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि ये हथियार सिर्फ ट्रांजिट में थे और इजराइली सेना को नहीं दिए जा रहे थे। लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के चलते ये स्पष्टीकरण संदेह के घेरे में आ गया है।
वहीं, हथियार बनाने वाली कंपनी Eurolinks ने मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है।
🌍 इजराइल के लिए रणनीतिक झटका
फ्रांस की यह घटना गाजा संघर्ष के बीच इजराइल के लिए एक कूटनीतिक और प्रतीकात्मक झटका मानी जा रही है। इससे इजराइल की अंतरराष्ट्रीय छवि और समर्थन प्रणाली पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यूरोप में भविष्य की हथियार डिप्लोमेसी और मानवाधिकारों की बहस को नई दिशा दे सकता है।
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