तेहरान/बीजिंग:
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने चीन से एक ऐसा सौदा किया है जिससे इजराइल और अमेरिका की चिंताएं बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने चीन से अमोनियम परक्लोरेट पाउडर (Ammonium Perchlorate Powder) की एक बड़ी खेप मंगाने का करार किया है। यह रसायन बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।
🎯 मिसाइल निर्माण की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस डील के जरिए 800 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि ईरान इस सैन्य मजबूती के जरिए न केवल इजराइली हमलों का जवाब देना चाहता है, बल्कि क्षेत्रीय संगठनों जैसे हूती विद्रोहियों को भी सपोर्ट करने की योजना बना रहा है।
🧪 क्या है अमोनियम परक्लोरेट?
अमोनियम परक्लोरेट (NH₄ClO₄) एक सफेद क्रिस्टलीय रसायन है जो ऑक्सीडाइजर की तरह काम करता है। इसे आमतौर पर सॉलिड रॉकेट प्रोपेलेंट में उपयोग किया जाता है क्योंकि यह ईंधन के जलने में मदद करता है। यह वह घटक है जो रॉकेट या मिसाइल के सफल प्रक्षेपण में निर्णायक होता है।
📦 चीन से डिलीवरी की तैयारी
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन अगले महीने यह पाउडर ईरान को भेजेगा। इसके बाद ईरानी टेक्नोलॉजिस्ट इसे मिसाइल उत्पादन में लगाएंगे। यह डील ऐसे वक्त पर हो रही है जब तेहरान को इजराइली हमले की आशंका है, खासकर उसके परमाणु ठिकानों पर।
⚠️ हूती विद्रोहियों को समर्थन की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, ईरान अपनी 800 संभावित मिसाइलों में से कुछ हूती विद्रोहियों को भी सौंप सकता है। ये वही हूती संगठन हैं जो यमन से इजराइल और अमेरिका के खिलाफ हमले कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से हूती लगातार तेल अवीव और अन्य इजराइली ठिकानों पर मिसाइलें दाग रहे हैं।
📉 क्षेत्रीय असंतुलन की आशंका
हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों पर इजराइल की कार्रवाई के चलते अब ईरान हूतियों को नई ताकत देने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नए सौदे से पश्चिम एशिया में सैन्य असंतुलन और बढ़ सकता है। अमेरिका और इजराइल दोनों ही इस डील को लेकर राजनयिक और खुफिया स्तर पर अलर्ट पर हैं।
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