कैनबरा:
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने गुआम (Guam) की एक प्राचीन गुफा में प्राचीन चावल के अवशेष खोजे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि करीब 3,500 साल पहले मानव समूहों ने जानबूझकर 2,300 किलोमीटर का समुद्री सफर तय कर चावल को प्रशांत द्वीपों तक पहुँचाया था।
यह खोज दर्शाती है कि प्रारंभिक प्रशांत यात्रा कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक अच्छी योजना के तहत की गई थी। शोध के अनुसार, फिलीपींस से आए पहले द्वीपवासी—जो आज के चामोरो लोगों के पूर्वज माने जाते हैं—ने यह जोखिम भरा समुद्री सफर किया और अपने साथ चावल भी लाए।
मैरिआना द्वीपों में पहली बार मिला चावल का प्रमाण
गुआम के रिटिडियन बीच की गुफा में मिले ये प्रमाण, प्रशांत द्वीपों में चावल की सबसे शुरुआती मौजूदगी को दर्शाते हैं। इसके पहले, दशकों तक शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में चावल के प्रमाण खोजने की कोशिश की थी लेकिन स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिल पाए थे।
इस शोध से प्रसिद्ध भाषाविद् रॉबर्ट ब्लस्ट के उस विचार को भी पुष्टि मिलती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पहले चामोरो लोग अपने साथ खेती योग्य पौधे भी लाए थे—जिनमें चावल शामिल था।
इतिहास की सबसे अद्भुत यात्राओं में से एक
शोध में पाया गया कि यह समुद्री यात्रा अचानक नहीं हुई, बल्कि यात्रियों ने साधनों, खाद्य स्रोतों और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ पूरी तैयारी से यह लंबा सफर तय किया।
चावल की खेती भले ही प्रशांत द्वीपों में मुश्किल रही हो, लेकिन ये लोग इसे साथ लाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस अनाज का केवल पोषण के लिए नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी था।
कैसे मिला चावल का प्रमाण?
शोधकर्ताओं ने फाइटोलिथ (phytolith) विश्लेषण का इस्तेमाल किया—यह पौधों की कोशिकाओं में बनने वाले सूक्ष्म सिलिका कण होते हैं जो हज़ारों वर्षों तक मिट्टी में संरक्षित रह सकते हैं।
गहन जांच में पाया गया कि मिट्टी के बर्तनों में चावल की भूसी के अंश चिपके हुए हैं, जो संकेत करते हैं कि इन बर्तनों का इस्तेमाल चावल पकाने या परोसने के लिए हुआ था—not for pottery tempering.
क्या यह कोई धार्मिक अनुष्ठान था?
चामोरो संस्कृति में गुफाओं को पवित्र स्थल माना जाता है, जहाँ विशेष पूजा-अर्चना होती थी। पुराने दस्तावेज़ बताते हैं कि 1500 से 1600 के बीच के समय में चामोरो लोग चावल को बहुत ही सीमित मात्रा में उगाते थे और उसका उपयोग केवल विशेष अवसरों जैसे किसी की मृत्यु के समय करते थे।
संभावना है कि प्राचीन यात्रियों ने गुफा में चावल का प्रयोग किसी अनुष्ठान या आध्यात्मिक प्रयोजन से किया हो, न कि रोज़मर्रा के खाने के रूप में।
प्रशांत में मानव विस्तार की शुरुआत
चावल की यह खोज उन प्राचीन मलायो-पोलिनेशियन भाषी समुदायों के महत्व को उजागर करती है जो ताइवान और फिलीपींस से निकलकर पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया और फिर प्रशांत महासागर तक फैले।
यह विस्तार ही बाद में ऑस्ट्रोनेशियन सभ्यता का आधार बना—जो आज लगभग 40 करोड़ लोगों में फैली हुई है, ताइवान से लेकर न्यूजीलैंड और मेडागास्कर से लेकर ईस्टर आइलैंड तक।
निष्कर्ष
यह अध्ययन दर्शाता है कि प्रारंभिक मानव यात्रा केवल भूख या दुर्घटना का परिणाम नहीं थी—बल्कि संस्कृति, योजना और साहस की मिसाल थी।
उन्होंने चावल जैसे अनाज को केवल भोजन नहीं, बल्कि एक प्रतीक के रूप में अपने साथ लेकर यात्रा की, जो आज भी उनकी विरासत का हिस्सा बना हुआ है।
(लेखक: प्रो. ह्सियाओ-चुन हंग, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी)
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