जॉर्जटाउन (गुयाना) – भारत के सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने गुयाना की आधिकारिक यात्रा के दौरान ऐतिहासिक, राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज की। कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर के नेतृत्व में प्रतिनिधियों ने गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली और नेशनल असेंबली के स्पीकर मंजूर नादिर से मुलाकात की।
मूल्य आधारित बातचीत और साझा चिंताओं पर चर्चा
थरूर ने संवाद के बाद कहा, “स्पीकर नादिर से हमारी चर्चा बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने हमारी बातों को समझा और पूरे प्रतिनिधिमंडल को अपने विचार साझा करने का अवसर मिला।” मुलाकात के दौरान भारत और गुयाना के द्विपक्षीय संबंध, व्यापारिक संभावनाएं, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
महात्मा गांधी और भारतीय विरासत को दी श्रद्धांजलि
इस दौरे की एक भावुक झलक देखने को मिली जब प्रतिनिधिमंडल ने जॉर्जटाउन स्थित प्रोमेनेड गार्डन में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ ही उन्होंने 1838 में गुयाना पहुंचे पहले भारतीयों की याद में बनाए गए व्हिटबी जहाज की ब्रॉन्ज रेप्लिका पर भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। यह वही ऐतिहासिक जहाज है जिसने भारतीय मजदूरों को गुयाना लाया था।
कूटनीति के जरिए आतंकवाद पर सख्ती
गुयाना यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ कठोर सैन्य कार्रवाई की है। इस पृष्ठभूमि में भारत ने सात बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न देशों में भेजा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत की ‘ज़ीरो टॉलरेंस फॉर टेररिज़्म’ नीति से अवगत कराया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इसके बाद भारतीय सेना ने सीमा पार मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 100 से अधिक आतंकवादियों का सफाया किया, जिनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से था।
भारत-गुयाना संबंधों में नई ऊर्जा
इस दौरे के जरिए भारत ने गुयाना के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को और मज़बूती दी है। महात्मा गांधी की विरासत, प्रवासी भारतीयों की स्मृतियाँ और व्यापारिक संबंधों के साथ यह यात्रा दो देशों के बीच आपसी समझ और साझेदारी को नया आयाम दे रही है।
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