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होली का त्योहार आने वाला है और हर कोई इसे खास तरीके से मनाना चाहता है। अगर आप इस बार बिना पानी की बर्बादी और बिना केमिकल वाले रंगों के होली खेलना चाहते हैं, तो जयपुर का मशहूर गुलाल गोटा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
क्या है गुलाल गोटा?
गुलाल गोटा एक हल्की और पतली गेंद होती है, जो लाख से बनाई जाती है। इसके अंदर खुशबूदार और हर्बल गुलाल भरा जाता है। इसका वजन लगभग 20 ग्राम होता है। जब इसे किसी पर हल्के से फेंका जाता है, तो यह टकराते ही टूट जाती है और सामने वाला व्यक्ति रंगों में सराबोर हो जाता है, बिना किसी चोट के।
जयपुर के मनिहारों की गली में पिछले करीब 300 सालों से यह परंपरा चली आ रही है। यहां के मुस्लिम कारीगर अपनी 7 पीढ़ियों से इसे बना रहे हैं। यह परंपरा जयपुर के राजा-महाराजाओं के समय से जुड़ी हुई है।
कैसे बनता है गुलाल गोटा?
गुलाल गोटा बनाने की प्रक्रिया बेहद खास होती है।
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सबसे पहले लाख को आग पर गरम किया जाता है जब तक वह मुलायम और पिघल न जाए।
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फिर पिघली हुई लाख को एक पतली फूंकनी पर लगाया जाता है।
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कारीगर उसमें मुंह से फूंक मारते हैं, जिससे वह गुब्बारे की तरह फूलकर एक पतली, पारदर्शी गेंद बन जाती है।
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बाद में उसे पानी में थोड़ी देर रखा जाता है ताकि वह सेट हो जाए।
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इसके अंदर खुशबूदार हर्बल गुलाल भरा जाता है और मुंह को अच्छे से बंद कर दिया जाता है।
यह पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है, इसलिए हर एक गुलाल गोटा खास होता है।
भारत ही नहीं, विदेशों में भी डिमांड
जयपुर का गुलाल गोटा सिर्फ राजस्थान या भारत तक सीमित नहीं है। इसकी मांग मथुरा-वृंदावन के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और इंग्लैंड जैसे देशों में भी है। लोग केमिकल वाले रंगों से बचने के लिए इसे पसंद कर रहे हैं, क्योंकि यह इको-फ्रेंडली और सुरक्षित होता है।
कीमत और पैकिंग
बाजार में गुलाल गोटा का एक बॉक्स लगभग 300 रुपये में मिलता है। एक बॉक्स में 6 अलग-अलग रंगों से भरे गोले होते हैं। इसे पूरी तरह हाथ से बनाया जाता है और इसमें लाख का इस्तेमाल होता है, इसलिए इसकी कीमत थोड़ी ज्यादा होती है।
अगर आप इस बार शाही अंदाज में और सुरक्षित तरीके से होली खेलना चाहते हैं, तो जयपुर का गुलाल गोटा जरूर ट्राई करें।
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