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गोदामों में स्टॉक होने के बावजूद खाद के लिए परेशान हैं किसान, सुविधाओं की कमी वाले वितरण केंद्रों पर दिनभर लगी रहती है लंबी लाइन

छतरपुर में खाद संकट: छतरपुर जिले में अभी भी खाद की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे किसानों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के खाद वितरण केन्द्रों पर हर रोज किसानों की लंबी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन अधिकांश किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है और वे निराश होकर घर लौट जाते हैं।

खाद के लिए लंबी कतारें: खाद की किल्लत के कारण किसानों को दिनभर इंतजार करना पड़ रहा है। वितरण केंद्रों पर पानी, छांव और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी है, जिससे किसानों को और भी ज्यादा परेशानी हो रही है। सोमवार को भी कई किसानों को घंटों इंतजार करने के बावजूद खाद नहीं मिल पाई।

किसानों की दयनीय स्थिति: पठापुर रोड के खाद वितरण केंद्र पर महिला किसान नन्हीं बाई ने बताया कि वह सुबह 7 बजे से इंतजार कर रही थीं, लेकिन उन्हें दोपहर 2 बजे तक खाद नहीं मिल पाई। ग्राम देवपुर के किसान वीरन अहिरवार ने बताया कि वह सुबह 5 बजे केंद्र पर आए थे, लेकिन उन्हें टोकन लेने के बाद भी खाद नहीं मिली।

वितरण केंद्रों पर पानी की व्यवस्था नहीं: ग्राम रमपुरा के किसान टंटू पाल ने बताया कि केंद्र पर पानी की व्यवस्था नहीं थी और भीड़ ज्यादा थी, जिससे खाद मिलना मुश्किल था।

टोकन बेचने की शिकायतें: कई किसानों ने खाद वितरण केंद्रों पर टोकन बेचने की शिकायत की। कुछ लोग अतिरिक्त टोकन लेकर किसानों से पैसे लेकर बेचते हैं। इस पर किसानों में गुस्सा है और उन्हें लगता है कि यह गलत तरीके से हो रहा है।

वितरण केंद्रों में व्यवस्थाओं की कमी: खाद वितरण केंद्रों पर पानी, छांव और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इससे किसानों की परेशानियों में और इज़ाफा हो रहा है और वे लंबे इंतजार के बाद भी खाद नहीं प्राप्त कर पाते हैं।

किसानों की परेशानी: यह संकट अब एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिससे किसानों को अपनी फसल उगाने में दिक्कत हो रही है। हालांकि, कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या को लेकर कदम उठाए हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें खाद समय पर मिलनी चाहिए ताकि उनके कृषि कार्य में कोई विघ्न न आए।

वर्तमान में खाद की उपलब्धता: मंगलवार को 99.25 मीट्रिक टन डीएपी और 119.4 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किया गया। इसके अलावा, 1283 किसानों को एनपीके खाद भी दी गई। जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य खादों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है, लेकिन वितरण में समस्या बनी हुई है।

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