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दमोह। जिले में शराब पीकर वाहन चलाने (ड्रिंक एंड ड्राइव) की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई सिर्फ शहर तक ही सीमित है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में पुलिस की निष्क्रियता साफ दिखाई दे रही है। इन इलाकों में न तो चेकिंग होती है और न ही चालान, जिससे नियमों का खुलकर उल्लंघन हो रहा है।
शहर में सख्ती, गांवों में ढील
दमोह शहर में ट्रैफिक पुलिस चौराहों और मुख्य सड़कों पर जांच अभियान चला रही है और ड्रिंक एंड ड्राइव करने वालों पर कार्रवाई भी कर रही है। लेकिन जिले के बाकी थाना क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
आदेश तो हैं, लेकिन पालन नहीं
पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ जांच अभियान चलाएं, ताकि सड़क हादसों पर रोक लगाई जा सके। लेकिन इन आदेशों का असर गांवों में नहीं दिख रहा। सिर्फ शहर में सख्ती से काम चल रहा है, जबकि गांवों में हालात लापरवाही भरे हैं।
7 दिन में 7 केस, 55 हजार का जुर्माना
18 से 25 जून 2025 के बीच, ट्रैफिक पुलिस ने ड्रिंक एंड ड्राइव के 7 केस दर्ज किए। इनमें से 4 मामलों में कुल 55,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि 3 मामलों में अभी चालकों को कोर्ट में पेश किया जाना बाकी है।
अधिकारी का बयान
दलबीर सिंह मार्को, ट्रैफिक थाना प्रभारी ने कहा,
“शहर में ड्रिंक एंड ड्राइव पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई हो रही है।”
निष्कर्ष: दमोह में ड्रिंक एंड ड्राइव पर कार्रवाई सिर्फ शहरों तक सीमित है। अगर गांवों और कस्बों में भी सख्त अभियान नहीं चलाए गए, तो सड़क हादसे बढ़ सकते हैं। पुलिस को पूरे जिले में एक जैसी सख्ती दिखाने की ज़रूरत है।
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