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ग्रीनलैंड में हर 92 सेकंड पर आते रहे भूकंप जैसे झटके, अब वैज्ञानिकों ने बताई असली वजह

सितंबर 2023 में ग्रीनलैंड में एक रहस्यमयी प्राकृतिक घटना ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया था। लगातार नौ दिनों तक हर 92 सेकंड पर झटके महसूस किए जा रहे थे। अब इस रहस्य से पर्दा उठ चुका है और इसके पीछे की वजह सामान्य भूकंप नहीं, बल्कि कुछ और ही निकली।

क्या हुआ था ग्रीनलैंड में?

उत्तर अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच बसे विशाल द्वीप ग्रीनलैंड के पूर्वी हिस्से में स्थित डिक्सन फजॉर्ड नामक इलाके में सितंबर 2023 के मध्य से असामान्य भूकंपीय गतिविधियां शुरू हो गई थीं। हर 1.5 मिनट पर झटके महसूस हो रहे थे, जिससे न केवल स्थानीय वैज्ञानिक, बल्कि पूरी दुनिया के भूगर्भ विशेषज्ञ चौंक गए।

NASA की सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा

इस घटना की गहराई से जांच करते हुए वैज्ञानिकों ने नासा और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी के संयुक्त मिशन SWOT (Surface Water and Ocean Topography) की सैटेलाइट इमेज का सहारा लिया। इन तस्वीरों में देखा गया कि डिक्सन फजॉर्ड क्षेत्र की एक बड़ी चट्टान गायब थी—संकेत था कि वहां कोई विशाल भूस्खलन हुआ था।

भूस्खलन से बनी मेगा-सुनामी

16 सितंबर को करीब 25 मिलियन क्यूबिक यार्ड चट्टान और बर्फ पानी में गिर गई—यह मात्रा लगभग 10,000 ओलंपिक स्विमिंग पूल जितनी थी। इस वजह से डिक्सन फजॉर्ड में अचानक एक विशाल सुनामी उत्पन्न हुई, जिसकी लहरें 650 फीट तक ऊंची उठीं। ये लहरें तंग फजॉर्ड में बार-बार उछलती और टकराती रहीं, जिससे पानी में दोलन पैदा हुआ और इस लगातार गति ने भूकंपीय तरंगों जैसी गतिविधि उत्पन्न की।

9 दिन तक चला यह ‘जल-भूकंप’

भूगर्भीय विश्लेषण से पता चला कि यह कोई पारंपरिक भूकंप नहीं था, बल्कि पानी की लहरों की निरंतर टकराहट और कंपन की वजह से कम-आवृत्ति वाली सिस्मिक तरंगें बनती रहीं। ये लहरें इतनी सटीक अंतराल पर उत्पन्न हो रही थीं कि जमीन के भीतर झटकों की तरह दर्ज की गईं—हर 92 सेकंड पर!

मशीन लर्निंग से सुलझी गुत्थी

इस अभूतपूर्व घटना का विश्लेषण करते समय वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग का भी उपयोग किया, जिससे पानी की ऊंचाई में छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव मापे गए। इन आँकड़ों को मिलाकर पूरी घटना को समझा गया और यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह एक जल-जनित सिस्मिक प्रभाव था, ना कि पारंपरिक भूकंप।

ग्रीनलैंड: बर्फ से घिरा दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप

डेनमार्क के अधीन आने वाला यह स्वायत्त क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसकी आबादी लगभग 55,000 से 57,000 के बीच है। यह द्वीप ज्यादातर बर्फ से ढका रहता है और इसके तटीय क्षेत्रों में गहरे फजॉर्ड्स और चट्टानी पहाड़ पाए जाते हैं।

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