ग्रेटर नोएडा वेस्ट का अनोखा गांव, जहां आज भी होती है रावण की पूजा, नहीं किया जाता दहन
channel_009 | Cultural News
देशभर में दशहरा आते ही रावण दहन की परंपरा देखने को मिलती है, लेकिन ग्रेटर नोएडा वेस्ट का एक गांव इस मामले में बिल्कुल अलग पहचान रखता है। यहां रावण को जलाया नहीं जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय लोग इसे अपनी आस्था और इतिहास से जोड़कर देखते हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि रावण सिर्फ अहंकार का प्रतीक नहीं था, बल्कि वह महान विद्वान, शिव भक्त और ज्ञानी राजा भी था। इसी सोच के चलते यहां रावण दहन की जगह उसकी पूजा की परंपरा निभाई जाती है। गांव के लोग रावण को अपने सांस्कृतिक विश्वास और पहचान का हिस्सा मानते हैं।
दशहरे के दिन जहां बाकी जगहों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं इस गांव में अलग माहौल देखने को मिलता है। लोग पूजा-पाठ करते हैं और रावण से जुड़े प्रसंगों को श्रद्धा के साथ याद करते हैं। यह परंपरा बाहरी लोगों के लिए भले ही हैरानी भरी हो, लेकिन गांव के लोगों के लिए यह सामान्य और सम्मान से जुड़ी बात है।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, रावण की पूजा करने की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। गांव के युवा भी इस रीति को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि हर परंपरा के पीछे कोई न कोई लोकमान्यता और इतिहास होता है, जिसे समझना जरूरी है।
channel_009 निष्कर्ष:
ग्रेटर नोएडा वेस्ट का यह गांव बताता है कि भारत की संस्कृति कितनी विविध और अनोखी है। जहां देशभर में रावण दहन होता है, वहीं यहां रावण की पूजा आस्था और परंपरा का हिस्सा बनी हुई है।
आपकी राय क्या है — क्या भारत की ऐसी अनोखी परंपराओं को और ज्यादा सामने लाया जाना चाहिए? कमेंट में बताइए।
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