Related Articles
क्या है मामला?
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक बड़ा साइबर ठगी का मामला सामने आया, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट केस’ कहा जा रहा है। इस केस में बिट्स पिलानी की महिला प्रोफेसर श्रीजाता डे से 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की गई। ठगों ने खुद को CBI, ईडी, ट्राई और महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताकर उन्हें डरा-धमका कर यह पैसा वसूला।
CBI का ऑपरेशन और गिरफ्तारियां
राज्य सरकार के कहने पर CBI ने इस केस को अपने हाथ में लिया और देशभर में ‘ऑपरेशन चक्र-5’ नाम से जांच शुरू की। जांच के दौरान मुंबई और उत्तर प्रदेश (मुरादाबाद, सम्भल) से चार मुख्य ठगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही जयपुर और पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर में भी छापेमारी हुई।
CBI ने कुल 12 जगह छापे मारे और बड़ी मात्रा में बैंक दस्तावेज, डेबिट कार्ड, चेक बुक और डिजिटल सबूत बरामद किए। सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
ठगी का तरीका – डर और धमकी से वसूली
ठगों ने श्रीजाता डे को स्काइप कॉल के जरिए डराया। कभी खुद को CBI, कभी ईडी, तो कभी मुंबई पुलिस का अफसर बताया। एक स्काइप मीटिंग में उन्हें नरेश गोयल केस से जोड़कर सुप्रीम कोर्ट में केस जाने की धमकी दी गई। डर के मारे प्रोफेसर ने 80 लाख रुपये का लोन लेकर भी पैसे दिए।
पैसे का ट्रांजेक्शन और विदेशी लिंक
29 अक्टूबर 2023 से 31 जनवरी 2024 तक प्रोफेसर से 42 बार ट्रांजेक्शन करवाए गए। बाद में जब मामला सामने आया तो झुंझुनूं के साइबर थाने में FIR दर्ज हुई। शुरुआती जांच में यह साफ हो गया कि यह ठगी एक अंतरराष्ट्रीय गैंग द्वारा की गई है और ठगी का पैसा विदेश तक पहुंचा है।
निष्कर्ष
CBI की तेज़ कार्रवाई से इस हाई-प्रोफाइल साइबर क्राइम के मुख्य आरोपी पकड़ में आ गए हैं। यह मामला देश में बढ़ती डिजिटल ठगी और फर्जीवाड़ों को लेकर एक बड़ा संकेत है कि सतर्क रहना कितना जरूरी है।
CHANNEL009 Connects India
