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चीन के छात्रों पर संकट के बादल: अमेरिका ने रद्द किए सैकड़ों वीजा, बढ़ी बेचैनी

वॉशिंगटन/बीजिंग: अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का असर अब शिक्षा क्षेत्र तक पहुँच गया है। अमेरिका ने हाल ही में चीन के कई छात्रों के वीजा रद्द करने का फैसला लिया है, जिससे हजारों चीनी विद्यार्थी अनिश्चितता और चिंता में डूब गए हैं। विशेष रूप से वे छात्र निशाने पर हैं, जिनका संबंध चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से है या जो तकनीकी रूप से संवेदनशील विषयों में अध्ययन कर रहे हैं।


विद्यार्थियों के बीच फैला डर और असमंजस

2023-24 के शैक्षणिक सत्र में अमेरिका में लगभग 2.7 लाख चीनी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जो अमेरिका में पढ़ने वाले सभी विदेशी छात्रों का एक बड़ा हिस्सा हैं। अब इनमें से एक बड़ी संख्या को वीजा निरस्तीकरण का सामना करना पड़ सकता है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के छात्र लिनकिन ने इसे अमेरिका की ओर से “चीनी बहिष्कार अधिनियम” की नई शक्ल बताया और कहा कि इस फैसले से उन्हें पहली बार अमेरिका छोड़ने का विचार आया है।


चीनी सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति

बीजिंग ने इस कदम की तीखी आलोचना की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इसे भेदभावपूर्ण और अनुचित ठहराते हुए कहा कि अमेरिका का यह निर्णय उसके “खुले समाज” के दावों को खोखला साबित करता है। चीन ने इस फैसले के खिलाफ औपचारिक विरोध भी दर्ज कराया है।


हांगकांग ने दिखाई दिलचस्पी

जहां अमेरिका में पढ़ने वाले कई चीनी छात्र अनिश्चितता से जूझ रहे हैं, वहीं हांगकांग ने इस स्थिति को अवसर में बदलने की कोशिश की है। हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली ने ऐलान किया है कि वे अमेरिका से प्रभावित छात्रों का खुले दिल से स्वागत करेंगे। उनका यह बयान इस ओर इशारा करता है कि हांगकांग खुद को एक नया शैक्षणिक केंद्र बनाना चाहता है।


भविष्य को लेकर गहराई चिंता

शिकागो विश्वविद्यालय की छात्रा जू रेंगे ने कहा कि अमेरिका में मौजूदा माहौल में उन्हें अपनी पढ़ाई से ज़्यादा स्थायी नौकरी तलाशने पर ध्यान देना पड़ रहा है, क्योंकि यहां रहना अब अस्थिर और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।


नीतियों का असर और ट्रंप की विरासत

अमेरिका में विदेशी छात्रों को लेकर नीति पहले से ही बहस का विषय रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी छात्रों की संख्या घटाने की कोशिश की थी, खासकर प्रतिष्ठित संस्थानों में। हालांकि अदालत ने इन कोशिशों पर फिलहाल रोक लगा दी है, लेकिन हालिया घटनाएं संकेत देती हैं कि भविष्य में चीनी छात्रों का अमेरिका में रहना और पढ़ना आसान नहीं रहेगा

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